जाके राखे साइयां, मार सके न कोई। यह कहावत बृहस्पतिवार को जाकिर कॉलोनी में लोगों की जुबान पर थी। मलबे में दबा मुर्गा पांचवें दिन जिंदा निकला। नफ्फो उर्फ नफीसा के बेटे आबिद ने मुर्गा उठाया और दिल से लगाया। लोगों ने कहा कि मलबे में दबकर दस लोगों की जान चली गई और मवेशी ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। मकान में रखा सारा सामान बर्बाद हो गया। एक वस्तु सुरक्षित नहीं निकली, ऐसे में मुर्गा कैसे जिंदा बच गया। यह बात दिनभर लोगों में चर्चा का विषय बनी रही।
जाकिर कॉलोनी में शनिवार शाम 4:30 बजे नफ्फो उर्फ नफीसा का तीन मंजिला मकान गिर गया था। जिसमें नफ्फो, उनका बेटा साजिद, पोती सानिया सहित परिवार के दस लोगों की मौत हो गई। परिवार के दो लोग घायल हुए थे। मकान में भूतल पर मवेशियों की डेयरी थी। जिसमें 30 से ज्यादा मवेशी थे। मलबे में मवेशियों की भी मौत हो गई। पांच दिन से लगातार नगर निगम की टीम मलबा हटाने में लगी थी। जनहानि के साथ मकान का सारा सामान मलबे में दबकर टूट गया। जिसको लेकर सरकार ने पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद की। वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार से बात करके प्रतिनिधि मंडल भेजकर पांच लाख की मदद कराई है।
बृहस्पतिवार को मलबा हटाने का कार्य चल रहा था। सुबह करीब 10 बजे मलबे में पांच दिन से दबा एक मुर्गा सुरक्षित निकला गया। जिसको देखकर हर कोई हैरान रह गया। मुर्गे के चोट तक नहीं थी। मलबा हटाने के दौरान नफीसा के बेटे आबिद वहां पर मौजूद थे। आबिद ने मुर्गे को गोद में उठा लिया। अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार ने बताया कि मलबा हटाने के दौरान मुर्गा निकला है। उसके ऊपर विंडो गिरी थी, जिसके नीचे मुर्गा निकला है।