यह था मामला
एसटीएफ मेरठ ने तीन नवंबर को नायरा कंपनी के मेरठ में 11 व बागपत में एक पेट्रोल पंप पर एक साथ छापा मारा था। मेरठ में परतापुर, ब्रह्मपुरी, इंचौली व हस्तिनापुर में पंपों पर मिलावट और घटतौली का खेल पकड़ा। पूर्व डीआईजी महेश मिश्रा के बेटे क्षेत्रीय प्रबंधक सुशांत मिश्रा, तीन पंप मालिक समेत 15 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था।
सात लोग जेल भेजे गए और आठ आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस की ढीली कार्रवाई पर सवाल उठे तो नौवें दिन मेरठ में चारों मुकदमे में 420, 467, 468, 471 व आईटी एक्ट की धारा बढ़ाकर कोर्ट में रिमांड की अर्जी लगाई। पुलिस ने लिखापढ़ी कर कोर्ट में दस्तावेज प्रस्तुत किए। मामले में गुरुवार को कोर्ट में पूरी बहस नहीं हो सकी, जिसके चलते सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय हुई है।
विवेचक ने रजिस्टर तक नहीं जुटाए
एसटीएफ ने तेल के खेल का भंडाफोड़ किया और आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को बुलाकर जांच कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचक ने बगैर पड़ताल के धोखाधड़ी की धारा बढ़ा दी। बताया गया कि तकनीकी के जरिये पेट्रोल में मिलावट के साक्ष्य मौके से जुटाए गए। लेकिन पंपों से रजिस्टरों का कोई लेखाजोखा नहीं जुटाया गया।