सूक्ष्म और लघु उद्योगों पर सबसे अधिक दबाव
भारतीय उद्योग संघ के उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल के अनुसार उद्योग पहले से ही बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार प्रतिस्पर्धा की चुनौती का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ईंधन की महंगाई ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। उनका कहना है कि सबसे अधिक असर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर पड़ रहा है। यदि ईंधन की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो इसका सीधा प्रभाव बाजार में दिखाई देगा और उत्पादों की कीमतें बढ़ना लगभग तय है।
कारोबारियों को लागत और मांग दोनों की चिंता
उद्योग जगत की चिंता केवल बढ़ती लागत तक सीमित नहीं है। कारोबारियों का मानना है कि उत्पादों के दाम बढ़ने से बाजार में मांग भी प्रभावित हो सकती है, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन लागत में निरंतर वृद्धि उद्योगों के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकती है, जिसका असर उत्पादन, परिवहन और उपभोक्ता कीमतों पर दिखाई देगा।