मेरठ जिला कारागार के बंदी और सजायाफ्ता कैदी भी घरों को रोशन करने में सहयोगी बनेंगे। इस दीपावली पर जिला कारागार के बंदी आटा चक्की से ईको फ्रेंडली दीप तैयार कर रहे हैं। झालर बनाने के लिए भी इन्हें प्रशिक्षण दिया गया है।
इस दीपावली पर मेरठ जिला कारागार के बंदी और सजायाफ्ता कैदी भी घरों को रोशन करने में सहयोगी होंगे। वह जेल में ही विशेष आटा चक्की की मदद से ईको-फ्रेंडली दीये तैयार कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें झालर बनाने का भी प्रशिक्षण दिया गया है।
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इससे पहले यहां के बंदियों ने सरकार के हर घर तिरंगा अभियान से जुड़कर अगस्त माह में 10 हजार तिरंगे बनाए थे। बंदियों के इस योगदान को देखते हुए अब प्रदेश सरकार ने बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनसे दीपावली पर्व पर दीये बनवाए जा रहे हैं।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि जेल में मौजूद विशेष आटा चक्की में गाय का सूखा गोबर, मुल्तानी मिट्टी और गोंद को मिक्स कर पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद उस पाउडर को एक सांचे में डालकर दीये बनाए जा रहे हैं। इन दीयों को कारागार मुख्यालय के आउटलेट पर भी रखा जाएगा।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि बंदी झालर भी बना रहे हैं। इसके लिए बंदियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उनका कहना है कि ऐसे कार्यों से बंदियों के हुनर का भी प्रयोग होता है और उनकी सोच भी सकारात्मक होती है।