मेरठ कोर्ट में सरेंडर करने आई आरोपी इंस्पेक्टर लक्ष्मीसिंह चौहान ने बताया कि मेट्रो चौराहा लिंक रोड का यह मुख्य चौराहा है। वहां से कुछ दूरी पर साहिबाबाद थाने का क्षेत्र भी शुरू होता है। शाम को सिपाही-दरोगा की ड्यूटी बदलती थी तो वहीं पर सिपाही व दरोगा पहुंचते थे। उसके बाद ड्यूटी बदलती थी। भ्रष्टाचार करना होता तो मैं वहां खुद सीसीटीवी कैमरे क्यों लगवाती? विवेचना में फुटेज को आधार बनाया गया है, लेकिन बैग में 70 लाख रुपये थे। इसको पुलिस साबित करे। मैं बेकसूर हूं।
एसपी सिटी, सीओ ने फंसाया
इंस्पेक्टर लक्ष्मीसिंह चौहान ने तत्कालीन एसपी सिटी गाजियाबाद और सीओ साहिबाबाद पर आरोप लगाया है। कहां कि मुझे साजिश के तहत फंसाया गया है। आरोपियों से मारपीट करके मेरे खिलाफ लिखवाया गया। कोई भी सबूत पुलिस के पास नहीं है। जिस दरोगा व ड्राइवर को नामजद किया गया, वह ड्यूटी पर ही नहीं थे। पुलिस ने शक के आधार पर मुकदमा बनाया। इसके अलावा गाजियाबाद जिले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। एक इंस्पेक्टर का नाम लिया, जिस पर एक करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप बताया।
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