स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्हें अपनी समस्याएं लेकर समाधान दिवस में आने को कहा गया था, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति से पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य ही विफल हो गया।
तहसील प्रशासन का कहना है कि अधिकांश अधिकारी मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में व्यस्त थे, जिसके चलते वे समाधान दिवस में शामिल नहीं हो सके। अचानक बदले कार्यक्रम का खामियाज़ा जनता को भुगतना पड़ा।
फरियादियों ने प्रशासन से मांग की है कि समाधान दिवस को औपचारिकता न बनाया जाए, बल्कि अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।