मेरठ के मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को पहली बार दो मरीजों की एंजियोप्लास्टी की गई। अभी तीसरे मरीज की चल रही है। एलएलआरएम के सुपर स्पेशलिटी ब्लाक में पहली बार एंजियोप्लास्टी कर इलाज किया गया। मेडिकल अस्पताल में पिछले सप्ताह ही कैथ लैब शुरू की गई है। एंजियोग्राफी के बाद अब एंजियोप्लास्टी हुई है। पल्लवरपुरम निवासी प्रांश सैनी और एक महिला आशा वर्मा (57 वर्ष) की एंजियोप्लास्टी हुई है। बताया गया कि डॉ. धीरज सोनी ने एंजियोप्लास्टी की।
क्या है एंजियोप्लास्टी
एंजियोग्राफी रक्त वाहिनी नलिकाओं धमनी व शिराओं का एक प्रकार का एक्सरे जैसा अध्ययन है। इसका प्रयोग हृदय रोग, किडनी संक्रमण, ट्यूमर और खून का थक्का जमने आदि की जांच में किया जाता है। हृदय के ठीक से काम न करने पर शरीर में रक्त का संचार रुक जाता है। एंजियोग्राफी से हृदय की धमनी में रुकावट व सिकुड़न का पता चल जाता है। एंजियोग्राफी के बाद बीमारी से ग्रसित धमनियों को खोलने के लिए ही एंजियोप्लास्टी की जाती है। इससे रक्त विहीन मांसपेशियों में खून का प्रवाह बढ़ जाता है। उसे आराम मिल जाता है। इससे हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। निजी अस्पताल में कोरोनरी एंजियोग्राफी के करीब 15-25 हजार रुपये लिए जाते हैं। वहीं सिंगल स्टेंट के साथ बैलून कोरोनरी एंजियोग्राफी के निजी अस्पतालों में एक लाख रुपये से ज्यादा लिए जा रहे हैं।