आत्महत्या तक के विचार आए
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि अधिकतर महिलाओं का मन दुखी रहना, रोना, घबराना, तनाव, चिंता और अनिद्रा की समस्या थी। महिलाओं में आत्महत्या का विचार तक आ रहा था। ऐसी महिलाओं को ठीक करने के लिए परिवार और दोस्तों के सहयोग की भी जरूरत पड़ती है।
मनोचिकित्सकों की सलाह
- समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें।
- मनपसंद काम जो समय न मिलने या कलह के कारण न कर पाए हों, करें।
- जितना हो पॉजिटिव सोचें। बुरे वक्त में भी अच्छे पक्षों पर गौर करें।
- अपनी भावनाओं को जाहिर करें। अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों को बताएं।
खुद को असहज महसूस कर रहीं
मन कक्ष की वरिष्ठ काउंसलर डॉ. विभा नागर ने बताया कि कि ये महिलाएं किसी भी कार्य को करने में खुद को असहज महसूस कर रही थीं। धीरे-धीरे इनकी आदत में शुमार हो गया और वे डिप्रेशन में चली गईं। लॉकडाउन के दौरान कारोबार बंद रहे, आर्थिक तौर पर लोग कमजोर हुए। लोग घरों में ज्यादा रहे जिस कारण आपसी कलह भी बढ़ी।
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