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खुलासा: आखिर सामने आई महिलाओं के डिप्रेशन में रहने की बड़ी वजह, डॉक्टरों ने दी ये सलाह

Sat, 31 Oct 2020 01:28 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सांकेतिक तस्वीर
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पतियों की गलत आदतें और बर्ताव महिलाओं को डिप्रेशन का मरीज बना रहा है। शराब पीने की लत, मारपीट और गाली गलौज से महिलाएं अवसाद का शिकार हो रही हैं। जिला अस्पताल की मानसिक रोग ओपीडी और मन कक्ष में 853 महिलाओं की काउंसिलिंग के दौरान यह बात सामने आई है। 

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एक तरफ कोरोना और लॉकडाउन के बाद हालात बदले हैं, तो दूसरी तरफ पतियों का गलत व्यवहार उनके मन पर गलत असर डाल रहा है। महिलाओं में एडजस्टमेंट डिसऑर्डर (समायोजन मनोविकार) की समस्या बढ़ रही है। ओपीडी में अधिकतर महिलाओं में इसी तरह की समस्या सामने आ रही है। इसके अलावा हर दूसरी महिला डिप्रेशन से ग्रस्त पाई जा रही है। काउंसिलिंग के दौरान पतियों को भी बुलाया गया। उन्हें समझाया गया कि घबराहट, अनिंद्रा और तनाव का बड़ा कारण दंपती के रिश्तों में तल्खी और व्यवहार भी है। काउंसिलिंग और इलाज के साथ-साथ व्यवहार में सुधार करें। ऐसा करने से महिलाओं को ठीक किया जा सकता है।

केस एक
घंटाघर की रहने वाली एक महिला नींद न आने और रोने का मन करने की शिकायत लेकर जिला अस्पताल आई थी। मन कक्ष में उसकी काउंसिलिंग की गई तो पता चला कि पति परेशान करता है, जिससे उसे नींद कम आती है। अपने भविष्य को लेकर सोचती रहती है और डिप्रेशन की शिकार हो गई है। 
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केस दो 
दिल्ली रोड की रहने वाली एक महिला जिला अस्पताल आई। वह सिरदर्द और मानसिक रूप से तनाव में थी। काउंसिलिंग में पता चला कि उसका पति उससे मारपीट करता है, शराब पीकर गाली गलौज करता है। जिससे वह परेशान रहती हैं।

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आत्महत्या तक के विचार आए
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि अधिकतर महिलाओं का मन दुखी रहना, रोना, घबराना, तनाव, चिंता और अनिद्रा की समस्या थी। महिलाओं में आत्महत्या का विचार तक आ रहा था। ऐसी महिलाओं को ठीक करने के लिए परिवार और दोस्तों के सहयोग की भी जरूरत पड़ती है।

मनोचिकित्सकों की सलाह
- समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें। 
- मनपसंद काम जो समय न मिलने या कलह के कारण न कर पाए हों, करें।
- जितना हो पॉजिटिव सोचें। बुरे वक्त में भी अच्छे पक्षों पर गौर करें।
- अपनी भावनाओं को जाहिर करें। अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों को बताएं।

खुद को असहज महसूस कर रहीं 
मन कक्ष की वरिष्ठ काउंसलर डॉ. विभा नागर ने बताया कि कि ये महिलाएं किसी भी कार्य को करने में खुद को असहज महसूस कर रही थीं। धीरे-धीरे इनकी आदत में शुमार हो गया और वे डिप्रेशन में चली गईं। लॉकडाउन के दौरान कारोबार बंद रहे, आर्थिक तौर पर लोग कमजोर हुए। लोग घरों में ज्यादा रहे जिस कारण आपसी कलह भी बढ़ी।

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