पार्षद के साथ पार्टी पर गलत टिप्पणी पर भड़के
भाजपा पार्षद गुलबीर सिंह का कहना है कि जीप में इंस्पेक्टर, दरोगा और चार पुलिसकर्मी थे। बेटे ने पुलिसकर्मियों को बताया कि वह पार्षद के बेटे हैं। मारपीट और फायरिंग से उसका कोई लेना देना नहीं है। कार पर पार्षद की नंबर प्लेट लगी थी। इस पर पुलिसकर्मियों ने टिप्पणी कर दी। बोले-पार्षद की नंबर प्लेट की जगह राष्ट्रपति के नाम की नंबर प्लेट लगा लेते। पुलिस के इस रवैये को लेकर आक्रोश बढ़ गया। चार घंटे थाने में दरोगा पर कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस के खिलाफ नारेबाजी होती रही।
इंस्पेक्टर नए थे, बाकी तो जानते थे
पुलिस ने तर्क दिया कि गलतफहमी में पार्षद के बेटे के साथ यह घटना हुई है। इस पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि इंस्पेक्टर नए थे, लेकिन दरोगा तो पुराने थे। जीप में बैठे हुए चार पुलिसकर्मी भी प्रिंस को जानते थे। इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह से उन्हें कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन दरोगा योगेंद्र को निलंबित किया जाए।
हमला करने वालों को भूल गई पुलिस
पार्षद पुत्र को पकड़ने को लेकर हंगामे के बाद पुलिस छात्र के साथ मारपीट, फायरिंग करने वालों को भूल गई। पीड़ित छात्र कहता रहा कि हमलावरों को पकड़ लो। लेकिन थाना पुलिस तो खुद की जान बचाने में जुटी हुई थी। पुलिस ने छात्र को थाने से चलता कर दिया कि वह अपनी शिकायत कल बताएं।
छात्र के साथ मारपीट और फायरिंग की सूचना पर गंगानगर पुलिस मौके पर पहुंची थी। पार्षद के बेटे के साथ पुलिस ने मारपीट नहीं की। जानकारी लेने के लिए उसको थाने लाए थे। इस मामले में विधिक कार्रवाई कराई जा रही है।
- केशव कुमार,एसपी देहात
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