इस तरह करें बचाव
- अपने प्रियजनों के संपर्क में रहें और जितना संभव हो, खुद को व्यस्त रखें
- परिवार के जिम्मेदार लोग बच्चों और बड़ों से बातचीत करते रहें
- हर कार्य को करने के लिए समय का निर्धारण होना चाहिए
- बच्चों को अनुशासित रखें और थोड़ी-थोड़ी पाबंदी लगाएं
- बच्चों और बड़ों संग नियमित रूप से प्राणायाम और मेडिटेशन करें
ये आती हैं समस्याएं
डोपामाइन या आनंद रसायन बढ़ने से बच्चों और बड़ों में आपराधिक प्रवृत्ति आ जाती है। ये गालियां देने और चीखने को अपना स्टेटस सिंबल समझ लेते हैं। दूसरे को नीचा दिखाने के लिए हर तरह के प्रयास करते हैं। इसके चलते नींद नहीं आती है और दिनचर्या बिगड़ जाती है। हृदय व श्वांस संबंधी रोग हो जाते हैं। मोटापा बढ़ जाता है। आंखें भी कमजोर हो जाती हैं।
- अभिभावकों को भूले बच्चे
एडिक्शन बढ़ने के कारण बच्चा अपनी ही दुनिया में खोया रहता था। काउंसलिंग के दौरान एक बच्चे ने बताया कि माता-पिता अगर उसे सुविधा नहीं दे सकते तो जन्म ही क्यों दिया। बच्चों ने काउंसलिंग के दौरान कई बार गाली-गलौज और किसी भी बात पर चिल्लाने लगते हैं।
- अपराध की तरफ जा रहे युवा
युवा सामने वाले को कूल डूड बनकर दिखाने का प्रयास करते हैं। वह मूवीज में इस्तेमाल शब्द बेझिझक प्रयोग करते हैं। पाबंदी लगाने पर लैपटॉप डबल स्क्रीन खोलकर चोरी-छिपे आपत्तिजनक चीजें देखते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए।
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