मेरठ में एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने का अवैध कारोबार भाजपा नेता संजीव गुप्ता 20 साल से कर रहा है। उसने करोड़ों की संपति अर्जित कर ली है। 2015 में भी नकली किताबें छापे जाने का भंडाफोड़ हुआ था। उसमें एनसीईआरटी ने क्लीन चिट देकर भाजपा नेता को बचा दिया था।
एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने के मामले में एक और खुलासा हुआ है। भाजपा नेता संजीव गुप्ता के खिलाफ 2015 में टीपीनगर थाने में केस दर्ज हुआ था। उसने सपा सरकार में सेटिंग करके खुद को बचाया था। एनसीईआरटी ने संजीव गुप्ता के गोदाम और प्रिंटिंग प्रेस में मिली नकली किताबों को एनसीईआरटी की अधिकृत बताई थीं। उसके बाद टीपीनगर पुलिस को दर्ज मुकदमे में एफआर लगानी पड़ी थी। एनसीईआरटी की 2015 की रिपोर्ट भी परतापुर पुलिस ने अपनी विवेचना में शामिल की है।
- कैसे मिली क्लीनचिट, बैठाई जांच
2015 में संजीव गुप्ता को कैसे क्लीन चिट मिल गई। इस मामले में एसएसपी ने जांच बैठा दी है। पुलिस एनसीईआरटी से भी जानकारी लेगी कि 2015 में किस आधार पर नकली किताबों को अधिकृत बताया गया था। पुलिस ने 2015 की केस डायरी भी निकाल ली है।
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- तब कहां थे सपाई
भाजपा नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता की गिरफ्तारी न होने पर सपा नेता हंगामा कर रहे हैं। आरोप है कि भाजपा सरकार में एनसीईआरटी की नकली किताबें छापी जा रही थीं और इसमें भाजपा के नेता भी शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जो सपा कार्यकर्ता अब हंगामा कर रहे हैं वे उस समय कहां थे। जब आरोपी भाजपा नेता को सपा सरकार में क्लीन चिट दे दी गई थी।
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