आदिल को उसकी मौत खींचकर मुजफ्फरनगर से सरधना के गांव नानू ले आई थी। न वह यहां आता और न ही उसकी छोटे भाई गुलफाम से झड़प होती।
आदिल शादी के बाद अपनी ससुराल सूजडू मुजफ्फरनगर में रहने लगा था। चार दिन पहले आदिल अपनी पत्नी गजाला को नानू छोड़कर गया था। शुक्रवार को वह पत्नी को बुलाने के लिए नानू गांव आया था। करीब दो साल पहले मौसी हसीना की मौत होने पर उनकी संपत्ति आदिल को मिली थी। तब आदिल ने छोटे भाई गुलफाम को कारोबार करने के लिए कुछ रकम दी थी। लेकिन गुलफाम आदिल से फिर से रुपयों की मांग करने लगा। इस बार आदिल ने रुपये देने से मना किया तो आरोपी ने अपने भाई की हत्या कर दी।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा का कहना है कि आरोपी को तलाश किया जा रहा है। उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच में यदि पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का मुखबिर तंत्र फेल, 17 घंटे तक नहीं लगी हत्या की भनक
सरधना के नानू गांव में शुक्रवार रात कारोबार के लिए रुपये न देने पर छोटे भाई गुलफाम ने बड़े भाई आदिल (27) की हत्या कर दी। इस वारदात ने पुलिस के मुखबिर तंत्र की पोल खोल दी है। 17 घंटे तक हल्का दरोगा, बीट के सिपाही और चौकीदार को भी भनक नहीं लगी। पारिवारिक मामला होने के कारण परिजन भी वारदात छुपाने के प्रयास में जुटे रहे। मीडिया में खबर प्रसारित होने के बाद पुलिस हरकत में आई और कार्रवाई शुरू की।
नानू गांव में गुलफाम ने आदिल की हत्या शुक्रवार रात एक बजे की। लहूलुहान हालत में ही परिवार के लोग जान बचाने के इरादे से आदिल को अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन चिकित्सकों ने इलाज के दौरान आदिल को मृत घोषित किया तो परिजन शव अपने साथ ले जाने व पोस्टमार्टम न कराने की जिद करने लगे। परिजन अस्पताल के स्टाफ को आदिल के छत से गिरकर घायल होने की जानकारी दे रहे थे। लेकिन अस्पताल कर्मियों ने शनिवार सुबह पुलिस केस बताते हुए थाने में सूचना दे दी। इसके बाद भी पुलिस ने जांच पड़ताल नहीं की। जबकि आला-ए-कत्ल और घटना से जुड़े साक्ष्य मौके पर पड़े रहे। मीडिया में खबर आने के बाद जब अधिकारियों ने संज्ञान लिया, तब शनिवार शाम छह बजे के बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा और कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने आदिल के पिता रशीद से तहरीर लेकर गुलफाम पर केस दर्ज किया।
मौसी ने गोद लिया था आदिल
परिजन ने बताया कि आदिल की दो साल पहले गांव सूजडू में गजाला से शादी हुई थी। आदिल का एक साल का बेटा आबान है। हत्या के बाद परिवार का रोकर बुरा हाल है। मौसी ने कोई बेटा नहीं होने के कारण आदिल को बचपन में ही गोद ले लिया था। तभी से वह मेरठ में भूमिया के पुल पर मौसी के यहां ही रहता था।