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Exclusive: आखिर हत्यारों तक कैसे पहुंच रहे जहरीले सांप? सपेरों ने झाड़ा पल्ला, बोले-हम तो बजा रहे नागिन बैंड

Thu, 30 Jul 2026 10:36 AM IST
Dimple Sirohi जेपी शर्मा, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के चर्चित हत्याकांडों में सांपों के इस्तेमाल के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जवाब तलाशने के लिए अमर उजाला की टीम मेरठ से करीब 44 किलोमीटर दूर गेसूपुर शुमाली और समसपुर गांव पहुंची। सपेरे दावा कर रहे हैं कि उन्होंने वर्षों पहले सांप रखना छोड़ दिया, फिर जहरीले सांप आरोपियों तक कैसे पहुंचे?
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आखिर कहां से आ रहे जहरीले सांप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में पत्नी की हत्या के बाद पतियों को नीले ड्रम में सीमेंट से चुनवाने और फिर उन्हें सांप से डसवाकर हत्या करने की वारदात सामने आई है। रविता और दामिनी ने अपने पतियों, अमित और अतुल की हत्या के लिए इस क्रूर तरीके को अपनाया। 

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उनकी मंशा थी कि हत्या के बाद किसी को शक न हो और सारा इल्जाम सर्पदंश पर डालकर वे आसानी से बच सकें।  इन मामलों में सपेरों द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से आरोपियों को सांप उपलब्ध कराने की जानकारी मिली है। 
पुलिस और वन विभाग की टीमें अभी तक सांपों की तस्करी और बिक्री से जुड़े कई सवालों का जवाब नहीं दे पा रही हैं।

यह भी पढ़ें: UP: पछतावे के साथ कट रही जिंदगी, मेरठ जेल की दो बैरकों में बंद हैं पति की हत्या की आरोपी नौ महिलाएं

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तेजनाथ- सपेरों का गांव, मेरठ - फोटो : अमर उजाला
गेसूपुर शुमाली और समसपुर का दौरा
अमर उजाला की टीम रविवार को मेरठ से लगभग 44 किलोमीटर दूर सपेरों के गांव गेसूपुर शुमाली और समसपुर पहुंची। यहां रहने वाले सपेरों ने बताया कि वे अब सांप रखने का काम छोड़ चुके हैं। वे या तो नागिन बैंड बजाकर या फिर नौकरी और मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि हत्या के मामलों में सांप लोगों तक कैसे पहुंचे, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि यदि सपेरे नागिन बैंड बजा रहे हैं, तो सांप कौन बेच रहा है और ये सांप हत्या के मामलों में इस्तेमाल के लिए कहां से आ रहे हैं?

कमलनाथ- सपेरों का गांव, मेरठ - फोटो : अमर उजाला
घरों के बाहर नागिन बीन के बोर्ड
गेसूपुर शुमाली गांव के रास्ते पर दाखिल होते ही मोपेड पर चारा रख रहे एक राहगीर ने सपेरों के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि दोनों पड़ोसी गांवों में बड़ी संख्या में सपेरे रहते हैं और गेसूपुर सपेरों का पुराना गांव है। गांव में प्रवेश करते ही दोनों ओर सपेरों के घर दिखाई दिए। अधिकांश घरों के बाहर नागिन बीन एंड भंगड़ा पार्टी के बोर्ड लगे थे।

कुछ दूरी पर 58 वर्षीय सपेरे कमलनाथ और उनके गुरु तेजानाथ मिले। कमलनाथ ने बताया कि लगभग तीन सौ वर्षों से उनका परिवार इस गांव में रह रहा है और अब उनके परिवार के 350 वोटर हैं। जब गांव के कई सपेरों से सांप मिलने के बारे में पूछा गया, तो अधिकांश ने जवाब दिया कि अब कोई भी सपेरा अब सांप नहीं रखता। 
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सपेरों का गांव, मेरठ - फोटो : अमर उजाला
अतुल की हत्या में सपेरे को तलाश किया जा रहा है। सपेरे ने उदय और सोनू को अपने गांव की ठीक जानकारी नहीं दी थी। इसके चलते उसे पकड़ने में समय लग रहा है। इस मामले में वन्यजीव   (संरक्षण) अधिनियम की धारा भी बढ़ा दी गई है। -पंकज लवानिया, क्षेत्राधिकारी मवाना
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