तेजनाथ- सपेरों का गांव, मेरठ
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गेसूपुर शुमाली और समसपुर का दौरा
अमर उजाला की टीम रविवार को मेरठ से लगभग 44 किलोमीटर दूर सपेरों के गांव गेसूपुर शुमाली और समसपुर पहुंची। यहां रहने वाले सपेरों ने बताया कि वे अब सांप रखने का काम छोड़ चुके हैं। वे या तो नागिन बैंड बजाकर या फिर नौकरी और मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि हत्या के मामलों में सांप लोगों तक कैसे पहुंचे, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि यदि सपेरे नागिन बैंड बजा रहे हैं, तो सांप कौन बेच रहा है और ये सांप हत्या के मामलों में इस्तेमाल के लिए कहां से आ रहे हैं?
कमलनाथ- सपेरों का गांव, मेरठ
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घरों के बाहर नागिन बीन के बोर्ड
गेसूपुर शुमाली गांव के रास्ते पर दाखिल होते ही मोपेड पर चारा रख रहे एक राहगीर ने सपेरों के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि दोनों पड़ोसी गांवों में बड़ी संख्या में सपेरे रहते हैं और गेसूपुर सपेरों का पुराना गांव है। गांव में प्रवेश करते ही दोनों ओर सपेरों के घर दिखाई दिए। अधिकांश घरों के बाहर नागिन बीन एंड भंगड़ा पार्टी के बोर्ड लगे थे।
कुछ दूरी पर 58 वर्षीय सपेरे कमलनाथ और उनके गुरु तेजानाथ मिले। कमलनाथ ने बताया कि लगभग तीन सौ वर्षों से उनका परिवार इस गांव में रह रहा है और अब उनके परिवार के 350 वोटर हैं। जब गांव के कई सपेरों से सांप मिलने के बारे में पूछा गया, तो अधिकांश ने जवाब दिया कि अब कोई भी सपेरा अब सांप नहीं रखता।
अतुल की हत्या में सपेरे को तलाश किया जा रहा है। सपेरे ने उदय और सोनू को अपने गांव की ठीक जानकारी नहीं दी थी। इसके चलते उसे पकड़ने में समय लग रहा है। इस मामले में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा भी बढ़ा दी गई है। -पंकज लवानिया, क्षेत्राधिकारी मवाना