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MEERUT: रक्तदान करने पहुंचे 187 युवाओं की स्वास्थ्य रिपोर्ट देख चौंके चिकित्सक, सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा

Thu, 26 May 2022 01:12 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेडिकल और जिला अस्पताल के ब्लड बैंकों की इस साल अप्रैल तक की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। युवा हेपेटाइटिस बी और सी, एचआईवी की चपेट में आ रहे हैं और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लग रही। पढ़ें ये पूरी रिपोर्ट।
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विस्तार
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युवाओं को पता ही नहीं चल रहा और वे एचआईवी, हेपेटाइटिस बी व सी की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल और जिला अस्पताल के ब्लड बैंकों की इस साल अप्रैल तक की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रक्तदान करने वाले 187 लोग हेपेटाइटिस सी व बी और एचआईवी के शिकार निकले हैं। इनमें अधिकांश 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं। 

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मेडिकल के ब्लड बैंक में एक जनवरी 2022 से 30 अप्रैल 2022 तक रक्तदान करने वालों में 11 एचआईवी पॉजिटिव, 72 हेपेटाइटिस सी और 54 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित पाए गए। वहीं, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की रिपोर्ट में छह लोग एचआईवी पॉजिटिव, 25 हेपेटाइटिस सी और 19 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित निकले।

इन दोनों ब्लड बैंकों में इस दौरान 4423 (जिला अस्पताल 1621 और मेडिकल कॉलेज 2802) यूनिट रक्तदान किया गया। इन बीमार लोगों का खून नष्ट कर दिया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इनसे संपर्क कर इलाज शुरू कराया।
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समय पर इलाज से ठीक हो सकता है हेपेटाइटिस-सी
मेडिकल की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रीति सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस सी (यकृतशोथ ग) इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। इलाज से यह ठीक हो जाता है। मेडिकल में इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है।

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जानलेवा है हेपेटाइटिस-बी
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस बी (यकृतशोथ बी) एक संक्रामक बीमारी है। इसके कारण लीवर की सूजन और जलन पैदा होती है। इसका इलाज वायरस रोधी दवाओं से किया जाता है। ये दवाएं खून में वायरस की मात्रा घटा सकती हैं या उन्हें हटा सकती हैं।

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है एचआईवी 
मेडिकल के एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर के प्रभारी रहे वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य ने बताया कि एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है, जिसकी वजह से एड्स होता है।

एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर पर तरह तरह की बीमारियां और इंफेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8-10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं।

इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है। वैसे, एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद से एड्स होने तक के अंतराल को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है और कुछ बीमारियों को ठीक भी किया जा सकता है। मेडिकल के एआरटी सेंटर में इनका इलाज किया जाता है। 

इन कारणों से होती हैं ये बीमारियां 
-दूषित सिरिंज का उपयोग करना।
-दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल।
-दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा।
-दूषित सुईं से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना।
-असुरक्षित यौन संबंध।

सतर्क रहें तो नहीं है खतरा 
कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है। अगर सावधानी बरतें, तो इन बीमारियों से बचे रह सकते हैं।
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