कई-कई बार भी बुलाया जाता है
ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक ही बार में मानसिक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। कई लोग ऐसे भी आते हैं, जिन्हें परखने के लिए कई बार बुलाना पड़ता है। कई ऐसे प्रश्न पूछकर उनके जवाब का आकलन किया जाता है। यदि जवाब सही रहता है तो इसके बाद ही उन्हें सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से मिसफिट का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है।
समय निकालना हो रहा मुश्किल
इसका दूसरा पहलू यह है कि मानसिक रोग ओपीडी पर इससे अतिरिक्त भार पड़ रहा है। पहले से ही रोज 150 से 200 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। शस्त्र लाइसेंस के लिए अतिरिक्त लोग आ रहे हैं। ऐसे में चिकित्सकों के लिए मरीजों के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है। दरअसल, मनोचिकित्सकों को मरीज की मानसिक स्थिति जानने के लिए एक-एक मरीज को ज्यादा समय देना होता है, ऐसे में उन्हें सामंजस्य बैठाने में परेशानी हो रही है।
हर रोज 25 से 30 लोगों को परख रहे
कुछ दिन पहले तक तो रोज 50 से ज्यादा लोग आ रहे थे। अब भी 25 से 30 लोग रोज मानसिक रोग ओपीडी में आ रहे हैं। इसमें उन्हें परखा जाता है कि वह शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं या नहीं।
- डॉ. कमलेंद्र किशोर, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
किए जाते हैं सवाल-जवाब
शस्त्र लाइसेंस के लिए ओपीडी में आने वालों से सवाल-जवाब किए जाते हैं। देखा जाता है कि वह किसी विशेष स्थिति में मन पर नियंत्रण रख सकते या नहीं। उनका मानसिक स्तर कैसा है। वह शस्त्र लेने के बाद इसका सही इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं।
- डॉ. विभा नागर, काउंसलर, मनोरोग विभाग
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