एक शख्स के टीका लगाती स्वास्थ्यकर्मी।
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कोरोना से बचाव के टीके के प्रति मुस्लिम इलाकों में कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इस कारण काफी लोग टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। खासकर 45 साल से ज्यादा उम्र के लोग टीकाकरण केंद्रों पर बहुत ही कम पहुंच रहे हैं।
जाकिर कॉलोनी में टीकाकरण केंद्र पर तीन दिन में महज 53 और इस्लामाबाद में 42 लोग पहुंचे। मवाना और सरधना के मुस्लिम इलाकों में भी ऐसी ही स्थिति है। इसके अलावा जहां मिश्रित आबादी है, वहां भी मुस्लिम तबके के लोग टीकाकरण कराने के लिए कम आ रहे हैं। उम्मीद थी कि रमजान समाप्त होने के बाद टीकाकरण की रफ्तार बढ़ेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
वहीं प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं। धर्मगुरुओं से भी अपील करा रहे हैं। इसका असर भी हुआ। शुक्रवार को इस्लामाबाद, जाकिर कॉलोनी, तारापुरी और मकबरा डिग्गी में 50-50 से ज्यादा लोग टीकाकरण कराने पहुंचे।
18 साल से ज्यादा वालों में स्थिति थोड़ी बेहतर
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में टीकाकरण के मामले में 18 साल से ज्यादा उम्र वालों में स्थिति थोड़ी ठीक है। 70 से 80 लोग प्रतिदिन टीका लगवा रहे हैं। हालांकि लक्ष्य किसी भी दिन पूरा नहीं हो पाया। जागरूकता की जरूरत है।
अफवाह के कारण बच रहे लोग
जिले में मुस्लिम बहुल क्षेत्र तथा दलित क्षेत्रों में टीकाकरण का प्रतिशत काफी कम है। ऐसा अफवाहों के कारण हो रहा है। टीकाकरण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इन क्षेत्रों में सामाजिक धार्मिक तथा राजनीतिक संगठनों से सहयोग प्राप्त कर रहे हैं, ताकि क्षेत्रों के अंदर टीकाकरण का प्रतिशत बढ़ाया जाए।
-डॉ. प्रवीण गौतम, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी