जीएसटी विभाग की टीम ने बहचौला गांव स्थित आरपीजी इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (प्लास्टिक रिसाइकल फैक्टरी) में फर्जी फर्मों से स्क्रैप खरीद दर्शाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम के नाम पर 1.5 करोड़ से अधिक की कर चोरी का खुलासा किया है। इसके आधार पर प्रिंसिपल अमाउंट का अनुमान लगाकर करीब 30 करोड़ रुपये का गोलमाल आंका जा रहा है। फैक्टरी संचालक का नेटवर्क गुजरात, दिल्ली, पंजाब सहित अन्य राज्यों के कारोबारियों से जुड़ा है।
जीएसटी टीम ने शुक्रवार को इस फैक्टरी पर छापा मारकर कर चोरी और अन्य अनियमितताओं की जांच शुरू की थी। यह फैक्टरी मवाना रोड स्थित डिफेंस कॉलोनी निवासी संजीव गुप्ता की है। जीएसटी कमिश्नर एमपी सिंह के आदेश पर यह कार्रवाई की गई। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य जरूरी सामान सील कर टीम अपने साथ ले गई। जीएसटी कमिश्नर एमपी सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में ही आईटीसी के नाम पर 1.5 करोड़ की कर चोरी पकड़ी गई है। अभी और अनियमितताओं और गोलमाल की पड़ताल जारी है।
दरअसल, इससे पहले भी जीएसटी लागू होने के बाद से फर्जी फर्मों से लेनदेन के नाम पर करोड़ों की कर चोरी के मामले सामने आ चुके हैं। कंपनी संचालकों ने अपनी कामवाली, सब्जी वाले और दूधवाले के नाम पर भी फर्जी फर्में खोल दी थीं। इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के बाद फर्म को बंद कर दिया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस फैक्टरी में भी कई ऐसी फर्मों को दर्शाया गया, जिनका अस्तित्व ही नहीं है।
आयकर विभाग को भी दी जाएगी जानकारी
जांच टीम के मुताबिक मिले छानबीन के आधार पर जीएसटी के साथ ही आयकर चोरी की भी पूरी संभावना जताई गई है। इसलिए जीएसटी विभाग आयकर विभाग को भी जानकारी देगा और आगे की जांच में उसकी मदद लेगा।