एक पुष्प वाली (सिंगल टाइप)- कलकत्ता सिंगल, रजतरेखा और मैक्सिकन सिंगल किस्में आती हैं।
दोहरे पुष्प वाली (डबल टाइप)- कलकत्ता डबल, पर्ल डबल और अलंकारिक पत्तियों वाली किस्म स्वर्ण रेखा प्रमुख हैं।
अर्ध दोहरे पुष्प वाली (मध्यम प्रकार)- वैभव, श्रृंगार और सुवासिनी किस्में सिंगल और डबल टाइप के संकरण से तैयार की गई हैं।
अलंकारिक पत्तियों वाली किस्म (दो रंगी)- रजतरेखा और स्वर्णरेखा प्रमुख हैं।
फूलों की कटाई, पैकिंग व पैदावार
रजनीगंधा की स्पाइक (पुष्प) को उस समय काटा जाना चाहिए, जब फूल पूर्णरूप से विकसित हो गए हों, लेकिन खुले न हों। स्पाइक काटने के लिए सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय उचित होता है। स्पाइक को जमीन से लगभग दो से तीन इंच ऊपर से तेज धार वाली छुरी से काटना चाहिए। काटी हुई स्पाइक को तुरंत पानी में डुबोकर रखना चाहिए। स्पाइकों को दर्जन अथवा सैकड़े के हिसाब से बंडल बनाकर अखबार के कागज से बांध दिया जाता है। स्पाइकों के तने का कटे सिरे वाला भाग पानी से नम कर देना चाहिए। बंडलों को गत्ते के डिब्बों में पैक करके स्थानीय बाजार या सुदूर क्षेत्रों में भेज सकते हैं। सिंगल किस्म से एक हेक्टेयर से लगभग 20 से 25 टन फूल तीन वर्ष की अवधि में प्राप्त होते हैं। दूसरे वर्ष में फूलों की उपज सर्वाधिक होती है, जो तीसरे वर्ष कम हो जाती है। एक हेक्टेयर क्षेत्र से लगभग 2.5 से 3.5 लाख स्पाइक प्राप्त होते हैं। वहीं, खुदाई के बाद 20 से 23 टन कंद प्रति हेक्टेयर प्राप्त होते हैं।
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