दो सितंबर 1983 को उनकी मौत कनाड़ा में हो गई। इधर, विमला देवी इस जमीन पर काबिज रहीं। आरोप है कि लेफ्टिनेंट कर्नल के कनाडा जाने के बाद साजिश के तहत तत्कालीन एडीएम भूमि अध्यापति अधिकारी पुष्पति, डिलिंग बाबू राजेंद्र शर्मा व हल्का लेखपाल कृष्णपाल निवासी कंकरखेड़ा ने सांठगांठ कर असल लेफ्टिनेंट कर्नल रोशनाल के स्थान पर किसी और व्यक्ति को खड़ा करके फर्जी व्यक्ति का फार्म-सी 11 बनवा लिया और फोटो चस्पा कर लिए।
लेफ्टिनेंट कर्नल रोशनाल के फर्जी हस्ताक्षर कर मुआवजा भी ले लिया। आरोप है कि मुआवजे की धनराशि को आरोपियों ने आपस में बांट लिया। वर्ष 1990 में मुआवजा लेने का नोटिस जारी होने पर वर्ष1991 में मुआवजा जारी नहीं करने का पत्र एडीएम को दिया गया था। बावजूद इसके संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों ने मुआवजा जारी कर दिया गया।
आरोप है कि सिविल लाइन थाना, एसएसपी, सीएम पोर्टल, मंडलायुक्त व डीएम को शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में जांच करने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज सिविल लाइन थाने में किया गया है। अभी इस मामले की जांच शुरु नहीं हो सकी है। जल्द ही सभी को नोटिस देकर पहले कार्यालय में बयान लिए जाएंगे। इस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामला पुराना है। ऐसे में आरोपी कहां-कहां है, उनकी क्या भूमिका रही है। इसकी जांच भी की जाएगी। -अभिषेक तिवारी, विवेचक, सीओ सिविल लाइन।