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कार्रवाई: भ्रष्टाचार के मामले में मेरठ के डीडीओ लखनऊ जेल में बंद, कई मामलों में चल रही जांच

Wed, 02 Mar 2022 12:16 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) पद पर तैनात दिग्विजय नाथ तिवारी लखनऊ जेल में बंद हैं। वर्ष 2007 से 2010 तक मनरेगा में आए बजट के लिए सात जिलों में गड़बड़ी को लेकर उन पर जांच बैठाई गई थी। 
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दिग्विजय नाथ तिवारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) पद पर तैनात दिग्विजय नाथ तिवारी लखनऊ जेल में बंद हैं। उन्हें दस दिनों पहले सीबीआई ने हिरासत में लिया था। संत कबीर नगर में बीडीओ पद पर तैनात रहे तिवारी के खिलाफ मनरेगा मामलों में जांच चल रही है। 
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दस फरवरी को मेरठ में हुए विधानसभा चुनाव के समय वह कर्मचारियों के प्रशिक्षण का कार्य संभाल रहे थे। चुनाव निपटने के बाद ही वह अचानक लापता हो गए थे। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की है।

वर्ष-2018 में मेरठ में तैनात हुए डीडीओ दिग्विजय नाथ तिवारी के खिलाफ मेरठ में भी कई मामलों में जांच चल रही हैं, लेकिन किसी भी मामले की जांच पूरी और स्पष्ट रूप से अधिकारियों ने नहीं की। इसके बावजूद भी डीडीओ को रजपुरा ब्लॉक का बीडीओ बनाया गया।
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कई मामलों में शहर के लोगों ने डीडीओ की शिकायत की थी। लखनऊ से आए संयुक्त आयुक्त प्रशासन ने भी सर्किट हाउस मेरठ में जिला विकास अधिकारी पर लगे आरोपों की जांच की थी। इस मामले में भी फाइनल जांच रिपोर्ट नहीं आ सकी। 
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दिग्विजय नाथ तिवारी - फोटो : अमर उजाला
सात जिलों में गड़बड़ी पर बैठी थी जांच : वर्ष 2007 से 2010 तक मनरेगा में आए बजट के लिए सात जिलों में गड़बड़ी में बलरामपुर, गौंडा, महोबा, सोनभद्र, संत कबीर नगर, मिर्जापुर, कुशीनगर शामिल थे। संत कबीर नगर में अनियमितता मिलीं।

संत कबीर नगर के मनरेगा मामले में हुई कार्रवाई 
इन शिकायतों में घिरे

1. रजपुुरा ब्लॉक के मुजफ्फरनगर सैनी गांव के निवासी कपिल की शिकायत पर मनरेगा लोकपाल ने जांच की थी। इसमें मनरेगा श्रमिकों ने बिना मजदूरी किए धन प्राप्त करने, श्रमिकों का जॉब कार्ड बनाया हुआ दिखाया गया, जबकि उनके द्वारा जो कार्य किया गया वो फर्जी साबित हुआ। इस कार्य को 86 हजार 159 रुपये का बताया गया। जांच में कार्य नहीं हुआ। 

2. लखनऊ से आकर सर्किट हाउस में संयुक्त आयुक्त प्रशासन राजेश कुुमार ने डीडीओ पर लगे आरोपों की जांच की। इसमें सजग प्रहरी के जिलाध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कई गंभीर आरोप की शिकायत शासन में की थी। उन्होंने अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार को पत्र लिखा था।

3. डीडीओ पर महिला उत्पीड़न के भी आरोप लगाए गए। इस मामले की जांच तत्कालीन एमडीए सचिव प्रवीणा अग्रवाल ने की। विकास भवन में तैनात महिला कर्मचारियों के सचिव ने अपने कार्यालय में एक-एक कर बयान लिए। हालांकि आरोप सिद्ध नहीं हुए। 

रजपुरा ब्लॉक में हुई मनरेगा गड़बड़झाले में आयुक्त ग्राम्य विकास को पत्र लिखकर सूचित कर दिया था। हालांकि, लोकपाल द्वारा एफआईआर संस्तुति मामले की जानकारी मुझे नहीं है। इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी। - के. बालाजी, जिलाधिकारी
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