तीन महीने बाद जब किसानों को पैसे मिलने बंद हुए तो उन्होंने गैंग द्वारा दिए गए मोबाइल नंबरों पर फोन किया, लेकिन वे सभी स्विच ऑफ मिले। किसान गैंग द्वारा बनाए गए कार्यालय पर पहुंचे तो पता चला कि 15 दिन पहले ही यहां से वह कार्यालय खाली कर चले गए हैं। किसानों को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने मध्यप्रदेश के नलखेड़ा थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई।
मध्य प्रदेश पुलिस के अलावा अधिकारियों ने किसानों से बात की तो पता चला कि कई ट्रैक्टरों में जीपीएस लगा हुआ है। एसएसपी ने पुलिस की चार टीमें बनाकर उत्तर प्रदेश के लिए रवाना कर दिया।
मेरठ एसएसपी रोहित सिंह सजवाण को पूरे प्रकरण की जानकारी दी। सोमवार और मंगलवार को मध्यप्रदेश पुलिस ने मेरठ से तीन, बागपत से दो और मथुरा छाता से एक ट्रैक्टर बरामद कर लिया। बाकी ट्रैक्टर की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।
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फर्जी कागजात बनाकर बेचे
मध्य प्रदेश पुलिस की टीम को जीपीएस की मदद से एक ट्रैक्टर की लोकेशन परतापुर के सोहरखा गांव में मिली। परतापुर पुलिस के साथ मध्य प्रदेश पुलिस की टीम यहां पहुंची तो युवक ने बताया की उसने ट्रैक्टर मुजफ्फरनगर के रहने वाले युवक से तीन लाख 32 हजार रुपये में खरीदा है।
मध्यप्रदेश से आई पुलिस टीम ने बताया कि दूसरे जिलों में भी ट्रैक्टरों की लोकेशन मिल रही है। ट्रैक्टरों के फर्जी कागजात बनाकर बेचा गया है।
मध्य प्रदेश पुलिस ने जीपीएस के जरिए तीन ट्रैक्टर की लोकेशन परतापुर थाना क्षेत्र में मिलने पर मेरठ पुलिस से संपर्क किया। परतापुर पुलिस ने तीनों ट्रैक्टर बरामद कराकर मध्य प्रदेश पुलिस को सुपुर्द कर दिए हैं। - शुचिता सिंह, सीओ ब्रह्मपुरी