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UP: महाबिल्वेश्वर नाथ मंदिर पर बढ़ा विवाद, मुख्य गेट पर लगा बैनर, वंशवाद का आरोप लगाकर DM-CM से शिकायत

Sat, 22 Jul 2023 11:47 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

Meerut News : मेरठ में बाबा महाबिल्वेश्वर नाथ महादेव मंदिर के मुख्य गेट पर एक बैनर लगा दिया गया। इस बैनर को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। वहीं, वंशवाद का आरोप लगाकर डीएम और सीएम से शिकायत की गई है।
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मंदिर के मुख्य गेट पर लगाया बैनर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब राजनीति ही नहीं धार्मिक संस्थाएं भी परिवारवाद के आरोपों से घिरने लगी हैं। मेरठ में बाबा महाबिल्वेश्वर नाथ महादेव मंदिर के बाहर लगे बैनर पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। इस बैनर में न केवल पारिवारिक ट्रस्टी का नाम और फोटो छपा है, बल्कि भावी पारिवारिक ट्रस्टी का भी नाम और फोटो छपा है। मंदिर परिसर में स्थापित दूसरे मंदिर और संस्कृत विद्यालय का संचालन कर रहीं समितियों ने मंदिर में वंशवाद शुरू करने का आरोप लगाते हुए डीएम और सीएम से शिकायत की है।

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सदर बाजार स्थित महाबिल्वेश्वर नाथ मंदिर पुरातत्व विभाग लखनऊ द्वारा रजिस्टर्ड है। मंदिर पारिवारिक ट्रस्ट चान्द रानी के अधीन और स्वामित्व में बताया जाता है। मंदिर के बाहर लगे बैनर में ट्रस्ट के संरक्षक मेहंतानी सुधा गोस्वामी, मैनेजिंग ट्रस्टी एवं कोषाध्यक्ष महंत दायनंद, महासचिव विशाल स्वामी, पारिवारिक ट्रस्टी प्रशांत स्वामी और पारिवारिक भावी ट्रस्टी को दिखाया गया है। इस बैनर के सामने आते ही विरोध शुरू हो गया। 

मंदिर परिसर में ही स्थापित जगन्नाथ मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष पवन गर्ग का आरोप है कि महाबिल्वेश्वर नाथ मंदिर रामायणकालीन है। दयानंद स्वामी दान दक्षिणा लेते हुए अब मंदिर को अपना बता रहे हैं। मंदिर को बेचने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में जिलाधिकारी से शिकायत की गई है।

वहीं, जगन्नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय गोयल विज्जी ने कहा कि परिसर में स्थित अन्य मंदिर की समितियों में कई मुकदमे कर के मंदिरों के विकास कार्य में बाधा डाली जा रही है। अब भावी ट्रस्टी का भी बोर्ड लगा दिया गया है।

इसी परिसर में बने श्री बिल्वेश्वर संस्कृत महा विद्यालय के अध्यक्ष महेश सिंघल ने बताया कि विद्यालय का 202 साल पुराना रिकॉर्ड है। जगन्नाथ मंदिर, शिव मंदिर और विद्यालय तीनों अलग-अलग संस्था हैं। संपूर्ण भूमि और मंदिर को महाबिल्वेश्वर नाथ मंदिर के महंत दयानंद स्वामी अपना बताते हैं। दयानंद स्वामी ने उन पर कई मुकदमे कर रखे हैं। छावनी परिषद की भूमि को भी यह अपना बता रहे हैं।

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हमारा परिवार सैकड़ों वर्षों से मंदिर का संरक्षक : महंत दयानंद
महाबिल्वेश्वर नाथ मंदिर के महंत दयानंद स्वामी ने बताया कि हमारा परिवार सैकड़ों वर्षों से जमींदार व खेवटदार के रूप में मंदिर के संरक्षक और कब्जेदार रहे हैं। महंतानी चंदरानी ने अपनी मृत्यु से पूर्व पारिवारिक ट्रस्ट समिति प्राचीन बाबा महाबिल्वेश्वनाथ महादेव मंदिर सिद्धपीठ सदर बाजार का पंजीकरण कराया। पुरातत्व विभाग लखनऊ में भी 16 अप्रैल 1980 स्वर्गीय महंतानी चांदरानी ने पंजीकरण कराया था। अब दूसरे लोग मंदिर की भूमि पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। कोर्ट से भी मंदिर की भूमि पर स्टे है।

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