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Meerut: दो अगस्त को सीएम के आने की संभावना, नंगलामल में तैयारियां तेज, मंदिर सौंदर्यीकरण की उठेगी मांग

Thu, 16 Jul 2026 10:28 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के नंगलामल स्थित प्राचीन शिव मंदिर में दो अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित दौरे को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। साधु-संतों और भाजपा नेताओं ने मंदिर सौंदर्यीकरण और अन्य मांगों को लेकर भी चर्चा की।

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सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
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 मेरठ के मुंडाली क्षेत्र स्थित नंगलामल गांव के प्राचीन शिव मंदिर में दो अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित आगमन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर परिसर में साधु-संतों और भाजपा पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें कार्यक्रम की रूपरेखा और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
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पुण्यतिथि समारोह में भेजा गया निमंत्रण
मंदिर के मुख्य पुजारी महंत विवेकानंद ब्रह्मचारी और महंत मीरा नंद ने बताया कि दो अगस्त को महंत सुरेशानंद की पुण्यतिथि मनाई जाएगी। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया गया है।

आयोजकों का दावा है कि मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए आने का आश्वासन दिया है। हालांकि, उनके दौरे का अंतिम कार्यक्रम अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुआ है।
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मंदिर परिसर में शुरू हुई तैयारियां
मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई का कार्य शुरू करा दिया गया है। जेसीबी की मदद से परिसर की सफाई कराई गई। साधु-संत लंबे समय से शंकर तालाब के जीर्णोद्धार और मंदिर के सौंदर्यीकरण की मांग करते रहे हैं।

आयोजकों का कहना है कि यह स्थान आदि शंकराचार्य और उनके शिष्यों की तपोस्थली एवं समाधि स्थल माना जाता है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि मुख्यमंत्री से इस स्थान को तीर्थस्थल घोषित करने का अनुरोध किया जाएगा।

पांच हजार पौधे लगाने की तैयारी
बैठक में मौजूद भाजपा जिलाध्यक्ष हरवीर पाल सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाएगा, जिसमें लगभग पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आगमन की संभावना को देखते हुए सभी तैयारियां की जा रही हैं।

कब्रिस्तान विवाद का मुद्दा भी उठाने की तैयारी
मंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि क्षेत्र में लगभग 50 बीघा भूमि में फैले कब्रिस्तान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। शंकराचार्य ट्रस्ट इस भूमि को अपनी तपोस्थली का हिस्सा बताते हुए इसे अवैध कब्जा होने का दावा करता है।

ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के दौरान इस विषय को भी उनके सामने रखा जाएगा। इस संबंध में विभिन्न पक्षों के दावे हैं और मामला लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है।
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