उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू के नाम वन क्षेत्र की जमीन कराने के मामले में आरोपी ट्रांसपोर्टर सुभाष शर्मा ने कुख्यात अजय जडेजा गैंग के शूटर के भाई मनीष शर्मा समेत पांच पर केस दर्ज कराया है।
उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू के नाम वन क्षेत्र की जमीन कराने के मामले में आरोपी ट्रांसपोर्टर सुभाष शर्मा ने कोर्ट के आदेश पर कुख्यात अजय जडेजा गैंग के शूटर प्रवीण शर्मा के भाई मनीष शर्मा समेत पांच लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें बताया गया कि उन्होंने 4.51 करोड़ की जमीन खरीदने के लिए 20 लाख की रकम पेशगी में दी थी। बाद में पता चला कि जमीन किसी और की थी। आरोपियों ने 20 लाख रुपये भी वापस नहीं लौटाए।
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शताब्दी नगर पंचवटी एनक्लेव निवासी सुभाष चंद शर्मा ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देते हुए बताया था कि वह कुछ भूमि शहर में खरीदना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अपने परिचित मनीष शर्मा से बात की। उसने शास्त्रीनगर थाना नौचंदी निवासी अशोक कुमार गुप्ता से मिलवाया। अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि दिल्ली रोड पर उनकी भूमि है, जिसे वह बेचना चाहते हैं। उन्होंने मोहकमपुर स्थित भूमि के कागजात दिखाए। भूमि का 4.51 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ। उन्होंने 20 लाख रुपये बतौर पेशगी अशोक गुप्ता के खाते में ट्रांसफर कर भूमि का एग्रीमेंट करा लिया। जिसके गवाह शास्त्रीनगर निवासी राजीव शर्मा और प्रशांत भारद्वाज थे।
समय पूरा होने के बाद भी अशोक कुमार गुप्ता ने उनके नाम बैनामा नहीं किया। बात करने पर अशोक कुमार गुप्ता और मनीष शर्मा तरह-तरह के बहाने बनाने लगे। उन्होंने अशोक कुमार गुप्ता को नोटिस भेजा तो पता चला कि उन्होंने वर्ष 2016 में अतुल रस्तोगी को इस भूमि के एग्रीमेंट की रसीद दी थी। अतुल रस्तोगी ने अपने पिता संतोष कुमार के नाम फर्जी बैनामा बनवाया था। दिल्ली निवासी शांति देवी और विमला देवी के फर्जी शपथ पत्र लगाकर किसी अन्य को खड़ा कर अपने पिता संतोष कुमार के नाम भूमि का दाखिल खारिज कराया था। जबकि शांति देवी और विमला देवी की मौत कई वर्ष पूर्व हो चुकी थी। कोर्ट ने पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। पुलिस ने मनीष शर्मा, अशोक कुमार गुप्ता, अतुल रस्तोगी, राजीव शर्मा और प्रशांत भारद्वाज के नाम रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
प्रवीण शर्मा और राजीव टुर्री की विनय त्यागी ने की थी हत्या
ब्रह्मपुरी निवासी राजीव टूर्री के भाई योगेंद्र भारद्वाज ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 24 अप्रैल 2015 को उसका भाई घर से आरटीओ ऑफिस जाने के लिए निकला था। इसके बाद वह घर नहीं लौटा। एक अधिवक्ता ने बताया था कि राजीव टूर्री और कुख्यात प्रवीण शर्मा की विनय त्यागी और मोनू त्यागी ने अगवा कर हत्या कर दी है और दोनों के शव गढ़ रोड स्थित काली नदी में फेंक दिए हैं।
30 जनवरी 2017 में अपहरण कर लूटपाट करने के आरोप में देहरादून के प्रेमनगर थाना पुलिस ने विनय को गिरफ्तार किया था। उस समय विनय ने प्रवीण शर्मा और राजीव टुर्री की हत्या करना कबूल किया था। बयानों का रिकार्ड प्रेमनगर थाने से लिया था। इसी बीच 2021 में राजीव के भाई योगेंद्र ने ब्रह्मारी थाने में विनय त्यागी और मोनू त्यागी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। देहरादून से जमानत मिलने के बाद विनय और मोनू फरार हो गए थे। क्राइम ब्रांच ने इसी साल चार जून को 50 हजार के इनामी कुख्यात विनय त्यागी को दिल्ली के कृष्णा नगर से गिरफ्तार किया था।
पूर्व डीजीपी ने वन क्षेत्र की नौ बीघा जमीन कराई थी अपने नाम
पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू पर धोखाधड़ी के जरिए ओल्ड मसूरी रोड वीरगिरवाली स्थित आरक्षित वन क्षेत्र की करीब नौ बीघा जमीन को अपने नाम कराने के आरोप लगे थे। अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में उन्होंने ओल्ड मसूरी रोड पर वीरगिरवाली स्थित आरक्षित वन क्षेत्र की करीब नौ बीघा जमीन अपने नाम करा ली थी। वहां साल प्रजाति के 25 पेड़ भी कटवा दिए थे। बताया जाता है कि यह भूमि दो दशक पूर्व किसी नत्थूराम व्यक्ति के नाम पर दर्ज थी। बाद में उस जमीन को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर दिया गया।
कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार बीएस सिद्धू ने मेरठ जिले में नत्थूराम नाम के व्यक्ति की तलाश की। इस नाम का व्यक्ति मेरठ के रोहटा रसूलपुर गांव में मिल गया। तत्कालीन ग्राम प्रधान चमन सिंह के जरिए नत्थूराम के फर्जी दस्तावेज बनवाए। रजिस्ट्री कार्यालय में उसे जमीन का मालिक दर्शाकर जमीन अपने नाम करा ली। यह दाखिल खारिज 13 मार्च 2013 को सिद्धू के नाम हुआ। इस दाखिल खारिज के खिलाफ काशीराम क्वार्टर डिस्पेंसरी रोड पर रहते असली नत्थूराम के बेटों ने अपर तहसीलदार कोर्ट से 25 मार्च 2013 को स्टे हासिल कर लिया था। इस बीच रहमुद्दीन और हाजी रिजवान नाम के व्यक्ति सामने आए।
इन्होंने जमीन की पॉवर ऑफ अटॉर्नी अपने नाम होने का दावा किया। तब सिद्धू ने नत्थूराम बनाए गए व्यक्ति की तरफ से इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। मामले की जांच शुरू हुई और इस बीच डीजीपी सिद्धू सेवानिवृत्त हो गए। यहीं से खेल की परतें खुलनी शुरू हुईं। पिछले साल अप्रैल में मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित हुई। एसआईटी जांच में डीजीपी को आरोपी बनाया गया। जांच के बाद इसी साल जुलाई में पूर्व डीजीपी बीरेंद्र सिंह सिद्धू निवासी उषा कॉलोनी, सहस्रधारा रोड, रहमुद्दीन निवासी निवासी पटेलपुरी, कंकरखेड़ा, मेरठ, हाजी रिजवान निवासी पटेलपुरी, कंकरखेड़ा, मेरठ, सुभाष शर्मा निवासी किनौनी, मेरठ, स्मिता दीक्षित निवासी आरएन बाजार, तोपखाना मार्ग मेरठ के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी।