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UP: अनिरुद्धचार्य महाराज बोले- प्राण चले जाएं, पर धर्म न जाए, जलमग्न मैदान में भी उत्साह से पहुंचे श्रद्धालु

Fri, 07 Jul 2023 07:01 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

कथा के दूसरे दिन भक्तों की संख्या पहले दिन के मुकाबले दोगुना रही। मैदान में दूसरे दिन भी जलभराव रहा लेकिन, पानी का स्तर कुछ कम हो गया।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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था भरा सोना लंका की दीवार में, एक रत्ती न मिला रावण को मरते बार में...। ऐसे शब्दों के साथ कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने कहा कि मानव को धन आदि का लोभ नहीं करना चाहिए। धन से बड़ा धर्म होता है। धन तो पापी भी कमा लेता है, लेकिन धन के लिए धर्म मत बिगाड़ो। बेटों को धर्मवान बनाओ। प्राण चले जाएं, पर धर्म न जाए। यदि पुत्र हैं तो पुत्र धर्म का पालन करें। मेहमान, स्त्री, पुरुष, राजा सभी काे अपने-अपने धर्म का पालन करना चाहिए। धर्म को जानने के लिए सत्संग की आवश्यकता है।

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अनिरुद्धाचार्य ने शुक्रवार को भैसाली मैदान में दूसरे दिन की कथा में यह बात कही। बृहस्पतिवार को हुए बारिश से जलमग्न इस मैदान में दूसरे दिन भी नियत समय पर कथा शुरू हुई। दूसरे दिन भक्तों की संख्या पहले दिन के मुकाबले दोगुना रही। महाराज श्री ने कहा कि सत्संग में मनुष्य को पूर्ण कर दिया जाता है। हर स्थान पर धर्म अलग हैं। कसाई के सामने सच बोलकर गाय का पता बताया तो पाप के हकदार बनोगे। कसाई अगर गाय को ढूंढ रहा है तो झूठ मत बोलो, लेकिन मौन हो जाओ। सामान्य जिंदगी में सदा सत्य मार्ग पर ही चलना चाहिए। दया धर्म का मूल है।

अच्छी सोच से हीन मनुष्य नेत्रहीन
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि जिस व्यक्ति के पास अच्छी सोच नहीं, वह नेत्रहीन ही माना जा सकता है। धृतराष्ट्र देख नहीं सकते थे पर गांधारी का पट्टी बांधना गलत था। पति अगर देख नहीं सकता है तो पति की आंखों की रोशनी बनो। विनाश जब आता है तो लोगों की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। महाभारत से सीख लो और बच्चों को लेकर कोई लापरवाही न करें। व्यर्थ में किसी पर हंसना नहीं चाहिए। पूरी जिंदगी की गाड़ी में भगवान को बिठाओ और चलते चले जाओ।

बेटों को नारी सम्मान करना सिखाओ
महाराज श्री ने कहा कि बेटियों को संस्कार दें और बेटों को नारी सम्मान करना सिखाएं। कथा के दौरान महाराज श्री आज विष्णु भगवान के विराट स्वरूप के बारे में भक्तों को बताया। इस दौरान ध्रुव चरित्र का वर्णन किया।
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तेरी बातों से भी प्यार मुझे...
महाराज ने भजन भी सुनाए। उन्होंने जो भी देना चाहो दे दो मुझे, तेरी बातों से भी प्यार मुझे...भजन सुनाया तो श्रद्धालु झूमने लगे। इसके बाद कहा कि भगवान कीर्तन पसंद करते हैं। नाम जप रहे तो किसी कि निंदा मत करो। इस बीच उन्होंने एक निर्धन ब्राह्मण की कथा भी सुनाई। भागवत कथा में राजेश अग्रवाल, नरेंद्र सिंघल, विपिन अग्रवाल ,सुमित सिंघल ,विजय गोयल, विवेक रस्तोगी, सुरेंद्र सिंधु, गणेश अग्रवाल ,पवन गर्ग आदि लोगों का सहयोग रहा।

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