स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ जंग का अस्त्र बनी खादी के लिए अब एक बार फिर शहर के युवाओं में दीवानगी है। युवाओं की पसंद कॉटन और लिनन है तो लड़कियों को सिल्क खादी भा रही है। मन को भाने वाले रंगों के साथ शाही और कूल लुक के साथ अब खादी डिजाइनर आउटफिट्स की तरह छाई है। इससे खादी के कारोबार और खंदक बाजार में नई जान आई है।
गांधी की खादी अब मेरठ शहर के युवाओं को खूब भा रही है। यहां स्थानीय इकाइयों में बनी खादी के साथ मधुबनी और टसर खादी विशेष पसंद है। खादी अब स्टेट्स सिंबल बन रही है। हर वर्ग खादी को पसंद कर रहा है। करीब 700 दुकानों वाले खंदक बाजार की पहचान खादी से ही है।
शहर में रशीद नगर, इस्माईल नगर, तारापुरी जैसे कुछ इलाकों में खादी बनाने के लिए पावरलूम के बाद अब कारीगरों ने शटरलेस मशीनें लगा ली हैं। यहां बड़ी संख्या में अपंजीकृत इकाइयां भी हैं। इस वजह से इन्हें बैंकों से कर्ज और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। शहर के 80 फीसदी खादी निर्माता स्थानीय बाजार के साथ दिल्ली और सूरत में भी सीमित मुनाफे के साथ माल सप्लाई करते हैं। सूरत और दिल्ली से मधुबनी, भागलपुरी, टसर सहित अन्य प्रदेशों की खादी को शहर के रिटेलर्स बेचते हैं।
भागलपुरी खादी युवाओं की पहली पसंद
ब्राइट रंगों के साथ लिनन खादी युवा सर्वाधिक पसंद कर रहे हैं। मधुबनी, भागलपुरी, आसम, खादी मिक्स, मटका, मूंगा, टसर सभी तरह की खादी को युवा वर्ग को पसंद आ रही हैं। शहर में सुभाष बाजार, आबूलेन, बेगमपुल, घंटाघर और सेंट्रल मार्केट सहित लगभग 800 काउंटर पर खादी की बिक्री होती हैं। शहर में प्रतिदिन का रिटेल कारोबार 8 से 10 लाख के बीच है।
काउंटर पर युवाओं की अच्छी संख्या
युवा वर्ग खादी पसंद कर रहा है। काउंटर पर युवा वर्ग ही ज्यादा दिखता है। शहर में बनने वाला खादी आज भी परंपरागत स्टाइल में कार्य कर रहा है। सूरत और दिल्ली के साथ दूसरे देशों से भी माल मंगवाया जाता है। हमारे ब्रांड के मुंबई में भी दो स्टोर हैं। - वैभव शर्मा, विद्यार्थी खादी भंडार, बुढ़ाना गेट
कारोबारियों की दुश्वारियां भी कम नहीं
रजिस्ट्रेशन और जीएसटी प्रक्रिया जटिल है।
विभिन्न एनएओसी लेने मिलने में समस्या है।
धागे पर 12 फीसदी तो कपड़े पर पांच फीसदी टैक्स।
टैक्सटाइल क्लस्टर का नहीं हुआ निर्माण।
टैक्सटाइन हब बनाने के लिए जमीन नहीं मिली।
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