मेरठ मेडिकल कॉलेज के स्टाफ पर आए दिन मरीज भर्ती न करने के आरोप लगते हैं। इसको लेकर तीमारदार भी हंगामा करते हैं। मेडिकल स्टाफ कभी इसकी वजह बेड फुल होना बताता है, तो कभी मरीज की हालत गंभीर बताकर हीलाहवाली करता है। जबकि सच्चाई यह है कि करीब 38 फीसदी बेड खाली रहते हैं। यह खुलासा खुद एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की गोपनीय रिपोर्ट में हुआ है।
पिछले साल ओपीडी में जनवरी से दिसंबर तक 9 लाख 50 हजार 424 मरीज आए। इनमें 92 हजार 128 मरीज दिसंबर माह में आए। मेडिकल कॉलेज में कुल स्वीकृत बेड की संख्या 750 (एमसीआई स्वीकृत) है, जबकि 1040 बेड तक इन्हें बढ़ाए जाने की स्वीकृति है। पिछले साल 12 महीनों में 33 हजार 289 मरीज भर्ती कराए गए, जबकि दिसंबर माह में 2852 मरीज भर्ती कराए गए थे। बेड ओक्यूपेंसी (फार्मूला सहित) के जरिये आंकड़ा निकाला गया तो पिछले 12 माह में सिर्फ 62 प्रतिशत बेड ही फुल रहे, 38 प्रतिशत बेड खाली रहे, जबकि दिसंबर माह में 64 प्रतिशत बेड फुल थे।