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Meerut News: मेडिकल में 50 सीटें पाने की उम्मीदों को फिर लग रहा झटका

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मेडिकल में 50 सीटें पाने की उम्मीदों को फिर लग रहा झटका
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- पिछले साल हुआ 15 चिकित्सकों का स्थानांतरण, सिर्फ तीन की हुई वापसी, 83 चिकित्सक हैं मानकों से कम

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की 50 सीटें वापस पाकर अपनी साख बचाने की उम्मीदों को फिर झटका लग रहा है। दरअसल, पिछले साल 15 चिकित्सकों का स्थानांतरण, जिनमें से सिर्फ तीन की वापसी हुई। अब भी 83 चिकित्सक मानकों से कम चल रहे हैं, जिनकी भरपाई नहीं हो पा रही है। फैकल्टी की कमी सीटें न बढ़ने के पीछे बड़ा कारण है।
पिछले साल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को उम्मीद थी कि न सिर्फ उनकी एमबीबीएस की पुरानी 50 सीटें वापस मिल सकती हैं बल्कि अतिरिक्त 50 सीटें भी मिल सकती हैं। इसके लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) में किया गया, लेकिन चिकित्सकों की कमी की वजह से आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। इस बार भी आवेदन किया है, लेकिन चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। हालत और बिगड़े हैं, क्योंकि चिकित्सक पहले से भी कम हो गए हैं।
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यह है मामला
साल 2019 में बेड के हिसाब से मरीजों की संख्या कम होने के कारण यहां की 50 एमबीबीएस की सीटें कम कर दी गईं थीं। इससे पहले यहां एमबीबीएस की 150 सीटें थीं, जो अब 100 हैं।

कोरोना की वजह भी नहीं आई काम

कोरोना की तीनों लहर के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने अपनी गवाईं 50 सीटों को फिर से पाने की तैयारी की। साथ ही 50 और सीटें बढ़ाने की कोशिश है ताकि 200 एमबीबीएस की सीटें यहां हो जाएं। तर्क दिया गया कि मेडिकल कॉलेज कोविड के इलाज का मुख्य केंद्र रहा है। मेरठ ही नहीं पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीजों का इलाज यहां किया गया। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी संचालित किया जा रहा है। यह तर्क बेड ऑक्योपेंसी और चिकित्सकों की कम संख्या के कारण नहीं चल सका और मेडिकल प्रबंधन एमबीबीएस सीटें बढ़ाने को लिए हाथ मलता रह गया। इस बार यही हालत हैं।

2013 में हुई थीं 150 सीटें

मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पहले 100 सीटें थीं। इन्हें बढ़ाकर साल 2013 में 150 कर दिया गया था। एमसीआई (अब एनएमसी) की टीमें तभी से मेडिकल कॉलेज को मानकों पर परख रही थीं, लेकिन हर बार बढ़ाई गई सीटों को लेकर खामियां रह जाती थीं। लिहाजा साल 2019 में एमसीआई के मानकों पर खरा न उतरने के कारण मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीटों को कम कर दिया गया था।
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एनएमसी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश
मेडिकल प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता ने बताया कि जब तक एमबीबीएस की सीटें वापस नहीं मिल जाती, तब तक एनएमसी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश जारी रहेगी। सीटें बढ़ाने के लिए फिर से आवेदन किया है। बेड ऑक्यूपेंसी पूरी की जाएगी और फैकल्टी की संख्या पूरी करने के लिए संविदा पर चिकित्सक रखे जा रहे हैं।
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