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जर्जर गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लेगा यांत्रिकी विभाग

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जर्जर गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लेगा यांत्रिकी विभाग
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मेरठ। जेएनएनयूआरएम अंतर्गत 400 करोड़ रुपये की लागत से शहरवासियों के घरों तक गंगाजल पहुंचाने के लिए भोला की झाल पर बनाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की हालत खराब है। प्लांट का संचालन गैर अनुभवी हाथों में होने से करोड़ों की मशीनें कबाड़ हो गई हैं। अब नगर निगम प्लांट को जल निगम की नागर इकाई से लेकर यांत्रिकी शाखा को देने की तैयारी कर रहा है। हालांकि यांत्रिकी शाखा ने जर्जर मशीनों की मेंटीनेंस के लिए धन मिलने के बाद ही प्लांट का संचालन करने के संकेत दिए हैं। फिलहाल यांत्रिकी शाखा जीएम जलकल विभाग द्वारा प्लांट के संचालन और मेंटीनेंस के लिए मांगे प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
शहरवासियों की पेयजल आपूर्ति की मांग पूरा करने के लिए जेएनएनयूआरएम के तहत चार साल पहले भोला की झाल पर 100 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, 21 किलोमीटर फीडर मेन (मुख्य पेयजल पाइप) लाइन एवं नौ भूमिगत जलाशयों का निर्माण किया था। फिलहाल इस प्लांट से 30 से 35 एमएलडी की पेयजल आपूर्ति की जा रही है। आज तक इस प्लांट को पूरी क्षमता से नहीं चलाया गया है। इसके बावजूद प्लांट की काफी मशीनें खराब हो चुकी हैं। महापौर सुनीता वर्मा द्वारा मई में किए निरीक्षण में प्लांट में 24 बिंदुओं पर बड़ी खामियां मिली थीं। इन्हें दूर कराने के लिए प्लांट संचालित कर रही जल निगम की नागर इकाई से कहा था। चार महीने बीतने के बाद भी जीएम जलकल रतन लाल को स्थिति जस की तस मिली।
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गैर अनुभवी हाथों में प्लांट का संचालन
जल निगम की नागर इकाई इस प्लांट का संचालन और रखरखाव करा रही है। नागर इकाई का संबंध सिविल वर्क से है। किसी भी दशा में प्लांट का संचालन और मेंटीनेंस यह विभाग नहीं कर सकता है। प्लांट के संचालन और रखरखाव का जिम्मा जल निगम की यांत्रिकी शाखा का है। जबकि आज तक इसे नहीं सौंपा जा सका है। नगर निगम के महाप्रबंधक जलकल रतन लाल ने प्लांट का संचालन यांत्रिकी शाखा को सौंपने की तैयारी कर ली है। इसलिए यांत्रिकी शाखा को पत्र भेजकर संचालन और रखरखाव का प्रस्ताव तैयार कर भेजने को कहा है। हालांकि यांत्रिकी शाखा ने प्लांट की खराब मशीनों और अनियमितताओं को दूर नहीं कर दिए जाने तक संचालन का जिम्मा लेने से इनकार कर दिया। हालांकि शाखा ने दो-चार दिन में प्रस्ताव बनाकर भेजने का संकेत दिया है।
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