यूनिवर्सिटी पेपर कराने के लिए सभी कॉलेजों को कॉपियों के बंडल भेजती है। पेपर होने के बाद जितनी कॉपियां बचती हैं, उनको वापस यूनिवर्सिटी में भेजने का कोई सिस्टम नहीं है। ऐसे में ये कॉपियां कॉलेजों के रूम में पड़ी रहती हैं। जिसके चलते कोई भी कर्मचारी इन कॉपियों को बाहर पहुंचा सकता है। इसके चलते इन कॉपियों के जरिए शिक्षा माफिया पूरा खेल कराते हैं। एसटीएफ इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि किन-किन कॉलेजों से कॉपियां बाहर भेजी जाती रही हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास भी इस बात का कोई जवाब नहीं है कि कॉपियों को
कर्मचारियों को करना पड़ेगा काम
कॉपियों का खेल सामने आने के बाद हटाए गए रिटायर कर्मचारी चंद्रप्रकाश की जगह दूसरे कर्मचारी काम करने में आनाकानी जता रहे हैं। ऐसे में कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने साफ कह दिया है कि जिस काम की जिम्मेदारी कर्मचारियों को दी जाएगी, वे उन्हें पूरे करने पड़ेंगे। अगर इसमें कोई लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक नारायण प्रसाद से साफ कह दिया कि मौज की नौकरी किसी की नहीं चलेगी।
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