एसआईटी ने मांगी जानकारी तो हुआ खुलासा
मामले की जांच एसआईटी कर रही है। उसने 31 कर्मचारियों को लखनऊ बयान देने के लिए नोटिस जारी किया। छात्रों की मार्कशीट जारी किए जाने के बारे में बृहस्पतिवार को सारा रिकॉर्ड खंगाला गया तो सच सामने आ गया। कुलपति ने दो कर्मचारियों सलेखचंद्र और पवन कुमार को सस्पेंड कर दिया और दो की आजीवन सेवा समाप्त कर दी गई।
लगातार हो रही कार्रवाई, फिर भी ये हाल
सीसीएसयू में डिग्री मार्कशीट बनवाने के नाम पर घूस लिए जाने की खबर अमर उजाला ने 27 मार्च 2019 को स्टिंग ऑपरेशन के साथ प्रकाशित की थी। जिसमें खुलासा हुआ था कि रोजाना 50 से 60 हजार रुपये डिग्री-मार्कशीट के नाम पर कर्मचारी कमा रहे थे। कुलपति ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। जून 1999 में परीक्षा विभाग में तैनात कर्मचारी को एंटी करप्शन की टीम ने रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया था। लगातार कार्रवाई के बाद भी कर्मचारी सुधरने को तैयार नहीं हैं।
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एमबीबीएस में बड़ा खेल
एमबीबीएस में दो साल पहले पेपर आउट हो गया था। विवि प्रशासन की जांच में सामने आया था कि मेडिकल कॉलेज में लिफाफे को खोलकर दोबारा चिपकाया गया। मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई, लेकिन पुलिस चुप्पी साधकर बैठ गई। एमबीबीएस में घूसखोरी का बड़ा रैकेट काम करता है। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के जिन दो छात्रों को यूएफएम के बावजूद रिजल्ट घोषित किया गया, इसके पीछे भी बड़ी घूस दिया जाना बताया जा रहा है। एमबीबीएस के छात्र बड़ी संख्या में पिछले साल मुजफ्फरनगर के जैन कन्या पाठशाला कॉलेज में बालों में विग लगाकर नकल करते पकड़े गए थे। इनको यूएफएम में डाला गया था, लेकिन ये सभी कोर्ट के आदेश पर परीक्षा दे चुके हैं।
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