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एमबीबीएस कॉपी घोटाले में बड़ी कार्रवाई: चार कर्मचारी सस्पेंड, दो छात्रों का रिजल्ट हुआ कैंसिल

Sat, 25 Jul 2020 11:10 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सीसीएसयू
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में 28 महीने पहले हुए एमबीबीएस कॉपी घोटाले के बाद कर्मचारियों ने एक और घोटाला कर दिया। जिन दो एमबीबीएस के छात्रों को एसटीएफ ने कॉपी लिखने के आरोप में जेल भेजा था, उन दोनों का प्रोफेशनल सेक्शन में तैनात रहे चार प्रभारियों ने रिजल्ट ऑनलाइन जारी कर दिया। यूएफएम की श्रेणी में होने के बाद भी चारों छात्र अगली कक्षा के फार्म भरते गए। बृहस्पतिवार को एसआईटी द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने पर पुराना रिकॉर्ड खंगाला तो मामला पकड़ में आया।

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कुलपति ने शुक्रवार देर शाम परीक्षा समिति की आपात बैठक बुलाकर चारों कर्मचारियों को सस्पेंड करते हुए जांच समिति बना दी है। कार्यालय अधीक्षक अमित कौशिक, प्रभारी हर्ष गुप्ता, प्रभारी राजकुमार गौतम और वरिष्ठ सहायक तृप्ति रस्तोगी को सस्पेंड किया गया है। साथ ही स्वर्णजीत और आयुष का रिजल्ट भी कैंसिल कर दिया। 

बता दें कि 17 मार्च 2018 को अमर उजाला ने एमबीबीएस की कॉपियां बदलने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। 18 मार्च को एसटीएफ ने कविराज नाम के एक छात्र नेता को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया था। एसटीएफ ने विवि के आठ कर्मचारियों को भी जेल भेजा था।
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छात्रों के जेल से आते ही शुरू हुआ खेल
एमबीबीएस कॉपी प्रकरण में जेल गए छात्रों का कर्मचारियों ने चुपचाप ऑनलाइन रिजल्ट जारी कर दिया। इसके बाद छात्र अगली कक्षा का फार्म भी भरते रहे।

एसटीएफ ने कविराज को कॉपी लिखकर देने वाले मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र स्वर्णजीत और आयुष को भी जेल भेजा था। दोनों के पिता हरियाणा में डॉक्टर हैं। विवि प्रशासन ने इन छात्रों को यूएफएम की श्रेणी में डाल दिया था। तत्कालीन रजिस्ट्रार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने प्रोफेशल सेक्शन के प्रभारी को पत्र लिखकर इनका रिजल्ट रोकने के आदेश दिए थे। लेकिन छात्रों के जेल से आने के बाद कर्मचारियों से उनका संपर्क हुआ तो घोटाला फिर से शुरू हो गया। प्रोफेशनल प्रभारी ने रजिस्ट्रार के आदेश को न परीक्षा विभाग में भेजा न ही कंप्यूटर विभाग में। कर्मचारियों ने मिलीभगत से दोनों का रिजल्ट ऑनलाइन जारी कर दिया। जिसके बाद जो भी प्रभारी रहा वह चार्ट में यूएफएम लिखा होने के बाद भी इनके पेपर दिलवाने को फार्म भरवाता रहा। 20 फरवरी 2020 को इनका फाइनल ईयर का रिजल्ट जारी कर दिया गया। इसमें आयुष पास है, जबकि स्वर्णजीत फेल है। इस पूरे घोटाले में कार्यालय अधीक्षक अमित कौशिक, प्रभारी हर्ष गुप्ता, प्रभारी राजकुमार गौतम और वरिष्ठ सहायक तृप्ति रस्तोगी शामिल रहे। ये सभी 2018 से अब तक यहां पर प्रभारी रहे और सारा घोटाला करते रहे।

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एसआईटी ने मांगी जानकारी तो हुआ खुलासा 
मामले की जांच एसआईटी कर रही है। उसने 31 कर्मचारियों को लखनऊ बयान देने के लिए नोटिस जारी किया। छात्रों की मार्कशीट जारी किए जाने के बारे में बृहस्पतिवार को सारा रिकॉर्ड खंगाला गया तो सच सामने आ गया। कुलपति ने दो कर्मचारियों सलेखचंद्र और पवन कुमार को सस्पेंड कर दिया और दो की आजीवन सेवा समाप्त कर दी गई।

लगातार हो रही कार्रवाई, फिर भी ये हाल 
सीसीएसयू में डिग्री मार्कशीट बनवाने के नाम पर घूस लिए जाने की खबर अमर उजाला ने 27 मार्च 2019 को स्टिंग ऑपरेशन के साथ प्रकाशित की थी। जिसमें खुलासा हुआ था कि रोजाना 50 से 60 हजार रुपये डिग्री-मार्कशीट के नाम पर कर्मचारी कमा रहे थे। कुलपति ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। जून 1999 में परीक्षा विभाग में तैनात कर्मचारी को एंटी करप्शन की टीम ने रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया था। लगातार कार्रवाई के बाद भी कर्मचारी सुधरने को तैयार नहीं हैं। 

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एमबीबीएस में बड़ा खेल 
एमबीबीएस में दो साल पहले पेपर आउट हो गया था। विवि प्रशासन की जांच में सामने आया था कि मेडिकल कॉलेज में लिफाफे को खोलकर दोबारा चिपकाया गया। मेडिकल थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई, लेकिन पुलिस चुप्पी साधकर बैठ गई। एमबीबीएस में घूसखोरी का बड़ा रैकेट काम करता है। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के जिन दो छात्रों को यूएफएम के बावजूद रिजल्ट घोषित किया गया, इसके पीछे भी बड़ी घूस दिया जाना बताया जा रहा है। एमबीबीएस के छात्र बड़ी संख्या में पिछले साल मुजफ्फरनगर के जैन कन्या पाठशाला कॉलेज में बालों में विग लगाकर नकल करते पकड़े गए थे। इनको यूएफएम में डाला गया था, लेकिन ये सभी कोर्ट के आदेश पर परीक्षा दे चुके हैं।

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