फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nikay Chunav Meerut: सामान्य वर्ग का हो सकता है महापौर, पार्षदों का भी समीकरण गड़बड़ाया

Wed, 28 Dec 2022 08:54 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

निकाय चुनाव के फैसले के बाद कई दावेदारों की तैयारियां धरी रह गई हाईकोर्ट के फैसले से दावेदारों को बड़ा झटका लगा है। नए फैसले से महापौर पार्षदों का भी समीकरण गड़बड़ा गया है।
विज्ञापन
निकाय चुनाव - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाईकोर्ट के फैसले से ओबीसी आरक्षण बगैर चुनाव होने पर मेरठ नगर निगम महापौर की कुर्सी सामान्य वर्ग को मिल सकती है। साथ ही वार्डों में भी पार्षदों के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।
विज्ञापन


नगर निगम चुनाव को लेकर उप्र सरकार ने नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष और वार्ड पार्षद पदों की आरक्षण सूची जारी कर दी थी। जिसके विरोध में कुछ लोग हाईकोर्ट चले गए। न्यायालय ने उप्र सरकार से पक्ष मांगा।

मंगलवार को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर सरकार चुनाव कराना चाहती है तो बिना आरक्षण के ही चुनाव करा सकती है अन्यथा नगर निगम चुनाव का आरक्षण तय करने के लिए पहले पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करना होगा।
विज्ञापन


हाईकोर्ट का यह निर्णय जैसे ही जनता के बीच पहुंचा तो सरकार की आलोचना शुरू हो गई। क्योंकि अब से पहले जिन नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में ओबीसी के लोगों ने चुनाव की तैयारियां की हुई थी, उनको बड़ा झटका लगा। मेरठ नगर निगम में महापौर की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित की गई थी। अगर अब नई व्यवस्था में यह सीट सामान्य वर्ग को मिलती दिख रही है। इसी प्रकार नगर निगम के 90 वार्डों के आरक्षण में भी फेरबदल होगा।

अभी तक जनता ने नहीं चुना सामान्य वर्ग का महापौर
नगर निगम मेरठ का इतिहास भी निराला है। 1995 में महानगर पालिका के चुनाव में पहली बार जनता को सीधे अपना नगर प्रमुख चुनने का अवसर मिला। तब से 2017 तक हुए नगर निगम चुनाव में महापौर सीट समान्य वर्ग के लिए रही। और महापौर पिछड़े वर्ग के ही विजयी होते रहे।

महापौर एक नजर में
- 1995 में महानगर पालिका के 60 वार्ड थे। नगर पमुख का यह पहला चुनाव जनता की वोट से हुआ। बसपा प्रत्याशी अयूब अंसारी नगर प्रमुख चुने गए। हालांकि बाद में नगर निगम बनने पर नगर प्रमुख का पद महापौर के नाम से जाना गया।
विज्ञापन

-वर्ष 2000 में सीमा विस्तार हुआ और 70 वार्ड बन गए। जनता ने बसपा के हाजी शाहिद अखलाक को महापौर चुना।
-वर्ष 2006 में निगम के 80 वार्ड हो गए। भाजपा की मधु गुर्जर को महापौर चुना। वह भी पिछड़े वर्ग से रहीं।
-वर्ष 2012 में भाजपा के हरिकांत अहलुवालिया को महापौर चुना लिया। वह भी पिछड़े वर्ग से ही माने गए।
-2017 में 90 वार्डों में चुनाव हुआ। तो एससी वर्ग से बसपा की सुनीता वर्मा को जनता ने अपना महापौर चुना।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें