मनुष्य को कभी धर्म से विमुख नहीं होना चाहिए: भारत भूषण महाराज
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के दसवें दिन बृहस्पतिवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य नरेंद्र जैन तथा शांतिधारा करने का सौभाग्य ब्रह्मचारी चंदन भैया, वीनू जैन को प्राप्त हुआ। देव, शास्त्र, गुरु व आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 201 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। गुरुवर आचार्य 108 भारतभूषण मुनिराज ने कहा कि पल भर के लिए भी मनुष्य को धर्म से विमुख नहीं होना चाहिए। विडंबना है कि धर्म के पास व्यक्ति उस मछली के समान होकर जाता है जो आक्सीजन लेने के लिए मात्र कुछ पल के लिए पानी से उछलकर बाहर आती है और फिर उसी में वापस चली जाती है। हम भी राग-द्वेष, व्यसन रूपी पानी में रहते हैं। देव दर्शन, संत समागम के लिए कुछ क्षण को उस पानी से निकलकर बाहर आते हैं और वापस उसी संसार रूपी पानी में चले जाते हैं। विधान का विसर्जन सलिल जैन ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन सोनिया जैन व सुदर्शन जैन ने किया। इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, शशांक जैन इंद्रसैन प्रवीण कुमार जैन, मनोज जैन, धनपाल जैन का सहयोग रहा।