शिवलिंग के चारों ओर स्टेनलेस स्टील का कलश स्टैंड बनाकर इसके ऊपर स्टील का कलश रखा गया। शिवलिंग के ऊपर रखे स्टील के क लश में ही भक्त दूध चढ़ाएंगे। कलश में चढ़े दूध की बेहद पतली धार शिवलिंग पर गिरेगी। शेष दूध स्टील के स्टैंड के एक पाइप से फूड प्रोसेस पाइप के माध्यम से अन्य बर्तन में एकत्र होता रहेगा।
यह काफी अच्छा प्रयास
डायरेक्टर साकेत सोसायटी शशांक शर्मा का कहना है कि यह काफी अच्छा प्रयास है। हमने इन युवाओं की मदद से शिवमंदिर में यह सिस्टम विकसित करा दिया है। बहुत ही अच्छा काम है अगर भगवान को चढ़ाया दूध गरीब बच्चों को मिले।
हम पूरी मदद करेंगे
महाप्रबंधक पराग डेयरी परतापुर एससी वर्मा ने कहा कि युवाओं का यह प्रयास बहुत अच्छा है। हम लोग दूध की शुद्धता की जांच के लिए उन्हें पूरी मदद करेंगे। जिससे यह प्रयास समाज के अन्य लोगों को अच्छे कार्य के लिए प्रेरित करें।
असली भक्ति तो मानव सेवा
संस्थापक सत्यकाम सेवा आश्रम अजय शर्मा का कहना है कि कलश से दूध एकत्र करके उसकी शुद्धता की पूरी जांच के बाद, साकेत शिव मंदिर से प्राप्त दूध आश्रम के बच्चों को देंगे, असली भक्ति तो मानव सेवा है। जिसे निभाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। लोगों को समाज सेवा के लिए आगे आना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है। पानी और दूध की बर्बादी रोकनी चाहिए।
यह बड़ी सेवा
मुख्य पुजारी शिवमंदिर साकेत पंडित तारानंद झा ने बताया कि ईश्वर हमेशा सर्वे भवंतु सुखिन: का संदेश देते हैं। मानवता ही परमधर्म बताया है। इसलिए नीलकंठ पर चढ़ा दूध जब गरीब बच्चों को पीने को मिलेगा तो यह बड़ी सेवा होगी।
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