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लोकसभा चुनाव 2019: असली मुद्दे गुम, भाषणों में सिर्फ आतंकी मसूद और पाकिस्तान

Sat, 30 Mar 2019 10:52 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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लोकसभा चुनाव 2019 - फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव में आम जन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे गुम हो रहे हैं, लेकिन आतंकी मसूद और पाकिस्तान का खूब जिक्र हो रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आतंकी मसूद अजहर का रिश्ता सहारनपुर से जोड़ने वाला जो बयान दिया, उसे भी मुद्दा बनाया जा रहा है। 

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जैसे- जैसे लोकसभा चुनाव के लिए प्रथम चरण में होने वाले मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे ही प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की तरफ से अपने प्रचार को तेज किया जा रहा है। शहर से लेकर गांवों में नुक्कड़ सभाएं की जा रही हैं। हर राजनीतिक दल के प्रत्याशी का यही प्रयास है कि किसी तरह से उसके पक्ष में माहौल खड़ा हो जाए। इसके लिए नेता हर हथकंडा अपनाने में लगे हैं। जहां भी सभा हो रही है, वहां नेता खूब बड़ी- बड़ी बातें करते हैं। भाजपा नेता विकास के साथ ही सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की बातें करते हैं, तो पाकिस्तान के आतंकी मसूद अजहर का नाम भी खूब उछाला जाता है। 

वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों शाकंभरी देवी मंदिर दरबार से चुनाव प्रचार का शंखनाद किया, तो उन्होंने भी तमाम बयानों के बीच एक ऐसा बयान दिया, जिससे दूसरे राजनीतिक दलों के लोग भी उसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उस बयान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि आतंकी मसूद अजहर का एक दामाद सहारनपुर में आ रहा है, जो उसी की भाषा बोलता है। इसके पलटवार में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद ने भी बयान दिया था कि आतंकी मसूद अजहर से मेरा क्या रिश्ता है, उसके प्रमाण दिए जाएं और किसी की राष्ट्रभक्ति पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। वहीं, अब अधिकांश जगह हो रही नेताओं की नुक्कड़ सभा में घूम फिरकर मसूद अजहर और पाकिस्तान का जिक्र हो रहा है। कहीं न कहीं इन भाषणों में जिले के महत्वपूर्ण मुद्दे गुम हो रहे हैं।

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ये हैं सहारनपुर के मुद्दे 
-- शिक्षा -- उच्च शिक्षा के लिहाज से सहारनपुर पिछड़ा हुआ है। युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए हरियाणा, उत्तराखंड के अलावा मेरठ या दिल्ली का रुख करना पड़ता है। हर साल 25 से 30 हजार अभ्यर्थी ऐसे होते हैं, जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए जिले से बाहर जाना पड़ता है। यूनिवर्सिटी स्थापना की मंजूरी प्रदेश सरकार ने दे दी और पुंवारका राजकीय महाविद्यालय का चयन भी हो गया, लेकिन आचार संहिता लगने के कारण इसका संचालन नहीं हो सका।  
-- स्वास्थ्य -- पिलखनी में राजकीय मेडिकल कॉलेज तो हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर न होने और संसाधनों का अभाव होने के कारण गंभीर मरीज को रेफर कर दिया जाता है। स्वाइन फ्लू सहित कई गंभीर बीमारियों की जांच की व्यवस्था तक नहीं है। 
-- यातायात व्यवस्था -- शहर में यातायात व्यवस्था लचर है। तीन प्रमुख हाईवे शहर के बीच से गुजर रहे हैं, जिस कारण भारी वाहनों की आवाजाही से शहर जाम में जकड़ा रहता है। ट्रैफिक जाम इस शहर की सबसे बड़ी समस्या है। करीब एक साल से बाईपास का निर्माण चल रहा है, लेकिन अभी पूर्ण नहीं हो पाया है। 
-- गन्ना मूल्य भुगतान -- जिले के गन्ना किसानों का करीब 577 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य चीनी मिलों पर बकाया है। प्रदेश सरकार की तरफ से अक्सर बकाया भुगतान को लेकर सख्त निर्देश दिए जाते रहे, लेकिन मनमानी कर रहे मिल प्रबंधन भुगतान नहीं करते हैं। 
-- सड़क --- अंबाला सहारनपुर हाईवे की हालत खराब है। दिल्ली सहारनपुर हाईवे का शिलान्यास तो हो गया, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ। 
-- वुड कार्विंग कारोबार -- सहारनपुर की पहचान वुड कार्विंग के लिए दुनियाभर में है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में यह परेशानी के दौर से गुजर रहा है। लकड़ी का डिपो बनवाने सहित विभिन्न मांगें वुड कार्विंग कारोबार से जुड़े लोगों की हैं।

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