प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दर्द को एक बार फिर से कुरेदा। कैराना पलायन के साथ ही मुजफ्फरनगर दंगे को याद दिलाया। जनता से पूछा कि क्या वे उस दंगे को भूल गए हैं? रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह पर प्रहार करते हुए कहा कि दंगे के दौरान वे अपने स्वार्थ के कारण चुप थे। आज भी दंगा संरक्षकों के खिलाफ उनकी जुबान नहीं खुलती।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने सहारनपुर में ही रैली कर चुनाव का आगाज किया था। आज फिर वे यहां आए हैं। उन्होंने सहारनपुर की धरती ननौता से ही पड़ोसी जनपद मुजफ्फरनगर और शामली तक को साधा। प्रधानमंत्री ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भी नमन किया और कहा कि उनकी आत्मा जहां कहीं भी होगी, उसे बेहद दुख होता होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शामली के कैराना का पलायन और मुजफ्फरनगर के दंगे भुलाए नहीं जा सकते। वोट बैंक की राजनीति के कारण चौधरी अजित सिंह ने सारी हदें पार कर दी हैं। दंगे के दौरान उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए। कहा कि तब भी वे चुप रहे और अब भी क्षेत्र में आकर सब भूल गए। दंगा संरक्षकों के खिलाफ उनकी जुबान नहीं खुलती है, लेकिन चौकीदार को गाली देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। शहर-शहर, गली-गली चौकीदार को गाली देते हुए घूम रहे हैं।
उन्होंने अजित सिंह के साथ जयंत चौधरी पर भी प्रहार किया। जयंत को ‘छोटा चौधरी’ बताते हुए कहा कि वह तो पिता से भी आगे निकल गए हैं। जिन लोगों ने उन्हें सम्मान और प्रतिष्ठा दी उन्हीं के खिलाफ बोल रहे हैं। जयंत सिंह के जाटों का ठेका लेने वाले बयान पर कहा कि आपने ठेका नहीं ले रखा तो किसी ने आपका भी ठेका नहीं ले रखा है।
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