अरे! उनके तो केवल एक लड़की है... देखना वंश कैसे चलेगा। लड़की का क्या, वो तो अपने घर चली जाएगी फिर मां-बाप का क्या होगा, एक लड़का तो होना ही चाहिए... क्या सिर्फ एक बच्चा? कुछ दूसरा ही किस्सा होगा तभी तो और बच्चा नहीं है ... पता नहीं क्या है, भगवान भरोसे है इनका तो... ऐसी तमाम बातें इन लोगों को सुनने को मिली। रिश्तेदारों और दोस्तों ने मन भर ताने दिए, आक्षेप लगाए और उलाहना दी। यहां तक कि कोई खराबी होगी तभी तो बच्चे... कहकर स्वास्थ्य अक्षमता का टैग भी लगा दिया। लेकिन इन लोगों ने समाज की बातों और तानों को अनसुना कर नियम का पालन किया। हम दो हमारे दो, हम दो हमारे एक का व्रत धारण कर उसका पालन किया।