हमें वापस आश्रम मत भेजना, यह कहकर बच्चे बिलख पड़े। उन्होंने बताया कि महाराज जब पीटता है तो उन्हें मां की याद आती थी। वह अपने घर बात करने के लिए कहते तो उनकी और अधिक पिटाई की जाती। भूखा रखा जाता था। उनके शरीर पर पड़े चोटों के निशान बता रहे थे कि किस तरह से उनके साथ मठ में अमानवीय बर्ताव किया जा रहा था।