धूल फांकती हैं इनकी फाइल
जान का खतरा और बदमाशों से खौफ के चलते जिले में हजारों लोगों ने शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए आवेदन किया हुआ है। लेकिन इनकी फाइलें थानों में या फिर कलक्ट्रेट स्थित असलाह विभाग में धूल फांक रही हैं। उनके आवेदनों पर सुनवाई करने वाला कोई नहीं हैं।
शस्त्र लाइसेंस लेकर चलते हैं अपराधी
मुकदमा दर्ज होने के बाद भी अपराधियों के पास शस्त्र लाइसेंस की कोई कमी नहीं है। वह आम लोगों को रौब दिखाने के लिए लाइसेंसी शस्त्र साथ लेकर चलते हैं। पुलिस-प्रशासन इस बात की जानकारी होने के बावजूद भी खामोश है। इन लोगों का थानों और सरकारी विभागों में में भी बोलबाला है। एडीजी और आईजी के निर्देश पर अभियान शुरू किया, जिसके बाद इन लाइसेंस धारकों की पोल खुली।
थानों में करा लेते सत्यापन
शस्त्र लाइसेंस धारकों को हर तीसरे साल सत्यापन और नवीनीकरण कराना होता है। लेकिन शस्त्र लाइसेंस धारक अपराधी है और उसके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हैं तो वह कैसे सत्यापन में पकड़ में नहीं आता। रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद भी थाना पुलिस कैसे अपराधियों के शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण पर मुहर लगा देती है। इसकी भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण की रिपोर्ट भेजी
सत्यापन के बाद अपराधियों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराने के लिए थाना पुलिस ने जहां जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजी। वहीं, लाइसेंस धारकों को नोटिस भी भेजा कि वह अपने शस्त्र को थाने में जमा कराएं। लेकिन इसमें गंभीरता न बरतने पर सवाल उठते हैं कि पुलिस अपराधियों के शस्त्र लाइसेंसों के प्रति गंभीर क्यों नहीं है।
अपराधियों के पास नहीं रहेगा शस्त्र लाइसेंस
मेरठ समेत जोन के सभी जिलों में अपराधियों के खिलाफ अभियान चल रहा है। कितने अपराधियों के पास शस्त्र लाइसेंस हैं, इसका भी सत्यापन कराया गया, जिसमें अपराधियों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के लिए प्रशासन को चिट्ठी लिखी गई। अपराधियों के पास शस्त्र लाइसेंस नहीं रहेगा।
- राजीव सभरवाल, एडीजी जोन
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