एक तेंदुए ने शहर में आतंक ही नहीं बरपाया, बल्कि लाखों का खर्च भी करा दिया। जो मैनपावर दूसरे कामों के लिए होनी चाहिए थी, वह इस तेंदुए में लग गयी। साथ ही इसे पकड़ने पर अलग से मोटा खर्च हुआ। सारी व्यवस्था और मैनपावर को जोड़कर देखें तो खर्च आठ लाख रुपये से ज्यादा बैठता है।
मंगलवार सुबह तेंदुआ निकला तो मिलिट्री अस्पताल का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। ऐसे में मरीज तो परेशान हुए ही, तीमारदार भी दहशत में आ गये। इस तेंदुए को रोकने और पकड़ने के लिए वन विभाग के साथ वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट की टीम लगी। सूत्रों के अनुसार इस टीम के आने-जाने और रहने पर दो दिन में करीब 50 हजार का खर्च आया। इसके अलावा पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस विभाग के 250 से ज्यादा जवान अतिरिक्त ड्यूटी में लगे। हालांकि इन्हें अतिरिक्त भुगतान नहीं होगा, लेकिन तेंदुआ ऑपरेशन के दौरान इनके वेतन पर नजर डालें तो पुलिस के सिपाही से लेकर अधिकारियों तक का दो दिन का वेतन करीब छह लाख से ऊपर बैठता है।
इसके अलावा वन विभाग ने भी तीन दिन तक प्राइवेट कर्मचारी जो हमेशा उनके ऑपरेशन में होते हैं, उस टीम को हायर किया था। इस टीम पर भी तीन दिन में करीब तीस हजार खर्च होने की बात कही जा रही है। वहीं, तेंदुए के हमले में जो चार लोग घायल हुए हैं, उनके इलाज भी आने वाले खर्च को जोड़ा जाये तो पूरा आंकड़ा सात लाख रुपये बैठता है। साथ ही इस दौरान तेंदुए को संभाले रखने और बाहर निकालने के लिए सैन्य संसाधनों का भी प्रयोग हुआ।
सेना के दो स्मोक कैंडल जहां प्रयोग किये गये, वहीं रात में उसका जेनरेटर भी प्रयोग किया गया। इसके अलावा अतिरिक्त विद्युत उपभोग भी सेना के खाते से भुगतान होगा। वहीं, बृहस्पतिवार को कानपुर से आयी टीम का खर्च अलग है। इस पूरे ऑपरेशन में आठ लाख रुपये से ज्यादा खर्च आने का अनुमान लगाया जा रहा है।