भाकियू का मकसद चुनाव लड़ने का नहीं किसान सेवा का है। बाबा टिकैत के बाद भाकियू के कमजोर होने के सवाल पर बोले कि उनका दौर अलग था। तब न तो किसान इस तरह जातियों में बंटा था और न ही इतनी ज्यादा समस्या थी। राजनीतिक दलों ने किसानों को अपने फायदे के लिए जातियों और धर्म में बांट दिया है। इससे किसान संगठन और उनके आंदोलन कमजोर होने लगे हैं। लेकिन भाकियू पर किसानों का आज भी विश्वास है। बाबा टिकैत के दिल्ली घेराव के एलान भर से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें फोन करने के सवाल पर कहा कि कांग्रेस ने किसानों की परेशानी समझते हुए 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया था। इससे पहले बाबा टिकैत के आंदोलन से ही 36 महीने का बिजली बिल माफ हुआ था। भाजपा सरकार तानाशाह हो चुकी है। अहंकार के आगे इसे कुछ नहीं दिख रहा है। इसे जगाने और अपना हक हासिल करने के लिए ही किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं।
टिकैत ने कहा कि उनकी यात्रा पर अराजकता फैलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है। भाकियू का साफ सुथरा आंदोलन करने का इतिहास है। हरिद्वार से लेकर यात्रा यहां तक पहुंच चुकी है, लेकिन किसानों ने अनुशासन का परिचय दिया है। प्रशासन ने जो रूट दिया उस पर ही चल रहे हैं। दूसरी तरफ चलने वाले लोग भी उनके अपने है। किसी को ऑफिस जाना है तो किसी को कॉलेज। किसान उन्हें परेशान क्यों करेंगे। टिकैत ने कहा कि सरकार को किसानों से किए वादे पूरे करने होंगे।त मिलेगी। अगर मांग नहीं मानी गई तो किसान हाईवे बंद कर देंगे और यात्रा बाईपास की बजाय शहर के अंदर से ले जाएंगे। जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह, संजय दौरालिया, सतबीर जंगेठी, टीटू मूंछ रहे।
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