18 हजार फीट की चोटी पर जीते और टेबल पर हार गए: बीएस पंवार
अतर 2 विशिष्ठ सेना मेडल प्राप्त सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर बीएस पंवार का कहना है कि कारगिल की लड़ाई में भारतीय सेना के शौर्य का लोहा दुनिया ने देखा और माना। सैनिकों ने शहादत दी। 18 हजार फीट की ऊंचाई से दुश्मन को भगाकर जमीन को कब्जामुक्त कराया।
मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान ने दूसरों देशों के माध्यम से मध्यस्तता कराई, तब मेज पर हुई बातचीत में हमें क्या मिला। सिर्फ हमने दुश्मन को सुरक्षित तरीके से वापस जाते हुए देखते रह गए। सेना का शौर्य कम नहीं हो जाता, लेकिन पाकिस्तान के साथ जो भी लड़ाईयां हुई हैं, उनमें हर बार टेबल पर हमने कुछ हासिल नहीं किया।
साल 1965 की लड़ाई में हाजी पीर दर्रा हमने कब्जा करने के बावजूद छोड़ दिया। क्यों छोड़ दिया, जबकि यह सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। साल 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने सरेंडर किया, लेकिन टेबल पर हमारी कौन सी शर्त मानी गई। सेना वीरता से लड़ती है और लड़ती रहेगी। लेकिन इस रवैये को कब तक ढोया जाएगा।
कारगिल की लड़ाई दुनिया की सबसे मुश्किल लड़ाईयों में एक थी। एयरफोर्स ने सेना का साथ दिया। लड़ाईयों के इतिहास में यह साझा अभियान याद किया जाता रहेगा। वीर सैनिकों की शहादत पर गर्व है। हर सैनिक भर्ती होने के दौरान युद्ध के लिए रोमांचित होता है। कारगिल के वक्त वह ब्रिगेडियर के तौर पर हिसार में थे। सैनिकों का इतना जोश देखकर आज भी रोमांच होता है।