अधिकारियों के मुताबिक मृतकों में हिमांशु (14) उसका भाई प्रशांत (16) पुत्र सुरेश चंद्र सैनी, लखमी (45) पुत्र भगीरथ और उनका भतीजा मनीष सैनी (18) पुत्र सुशील, महेंद्र (45) पुत्र कमलू और लक्ष्य पुत्र सुनील (12) हैं। गांव के लोगों ने बताया कि राली चौहान गांव के 16 कांवड़िया गुरुवार को हरिद्वार से डाक कांवड़ लेने गए थे। शनिवार रात को सवा आठ बजे डाक कावंड़ लेकर गांव लौट रहे थे। भावनपुर थाना क्षेत्र में गांव से एक किलोमीटर पहले अचानक से 25 फीट ऊंची डाक कावंड़ के डीजे का फ्रेम 11 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन से टकरा गया।
करंट लगने से सभी झुलस गए। घायलों को आनंद अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया। आनंद अस्पताल में हिमांशु, महेंद्र, प्रशांत, लखमी और लक्ष्य को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मनीष की मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि झुलसे हुए लोगों को तत्काल उपचार दिलाया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम अस्पतालों में जा रही है। छह कावड़ियों की मौत के बाद गांव में कोहराम मचा गया। परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है।
भगवान भोलेनाथ को कोसते रहे परिजन और ग्रामीण
हादसे के बाद जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो सभी इधर-उधर पड़े थे। जिन्हें देखकर चीत्कार मच गई। आनन-फानन में अलग-अलग अस्पतालों में लेकर पहुंचे। कुछ ग्रामीण बोले भगवान भोलेनाथ ऐसे क्या गलती हुई जो यह मनहूस पल दिखाया। सभी लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से चंदा इकट्ठा किया था और पूरी भक्ति के साथ गंगाजल लेकर आए थे। यह हादसा अब पीड़ित परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे गया।
हादसे का पता चलते ही गांव का बच्चा, बुजुर्ग और महिलाएं घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़े। छिलौरा समेत कई अन्य गांवों के ग्रामीण भी वहां पहुंच गए। किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में यह पहला हादसा है जिससे पूरे गांव में चीत्कार मच गई। इस दर्दनाक मंजर को जीवन भर नहीं भुलाया जा सकता।
13 जुलाई को गुरुग्राम में भी बड़ा हादसा होने से बच गया था। हालांकि एक कांवड़िये की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य बाल-बाल बच गए थे। कैंटर में अधिक ऊंचाई पर साउंड सिस्टम लगााया गया था, जो बिजली के तारों में उलझ गया था। बिजली का पोल टूटकर कैंटर पर गिर गया था। इसमें प्रियांशु की मौत हो गई थी। इसके अलावा भी डाक कांवड़ में पहले भी कई बार हादसे हो चुके हैं। इसकी वजह यह है कि डाक कांवड़ में साउंड सिस्टम को काफी ऊंचाई तक लगाया जाता है, जो अक्सर हादसे का सबब बनता है।