कम उम्र में शुरू हुआ आध्यात्मिक सफर
देवी चित्रलेखा का जन्म 19 जनवरी 1997 को हरियाणा के पलवल जिले के खंबी गांव में हुआ। महज चार वर्ष की उम्र में उन्होंने गिरधारी बाबा के मार्गदर्शन में गौड़ीय वैष्णव परंपरा की दीक्षा ली। सात वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रवचन दिया। इसके बाद से वह श्रीमद्भागवत कथा और आध्यात्मिक विचारों के माध्यम से लोगों तक भक्ति, संस्कार, पारिवारिक मूल्यों और सकारात्मक बदलाव का संदेश पहुंचा रही हैं।
ये बोले मुख्य आयोजक...
- पायल फर्नीचर नीरज मित्तल ने कहा कि भागदौड़ की जिंदगी में आज हर कोई तनाव से जूझ रहा है। ऐसे में देवी चित्रलेखा जीवन जीने का सही मार्ग दिखा रही हैं।
- एपेक्स ग्रुप से अतुल गुप्ता ने कहा कि देवी चित्रलेखा भजनों और श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से लोगों जीवन को सरल बनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
- जिला क्रीडा भारती से अश्वनी गुप्ता ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए जरूरी हैं। इसलिए इस विशेष कार्यक्रम का लाभ सभी उठाएं।
- मीरा ज्वैल हाउस से अर्चित सिंघल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को भी जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही दिशा दिखाते हैं।
ये हैं कार्यक्रम में सहयोगी...
पायल फर्नीचर, विवेक रिसॉर्ट बाफर, अमित गर्ग मूर्ति, मायरा फाउंडेशन, रामचंद्र सहाय आनंद स्वरूप, राधा गोविंद बैंक्वेट, मीरा ज्वैल हाउस, रायल 9 होटल, शारदा टीवीएस, ऋषभ एकेडमी, पराग, एपैक्स ग्रुप, अजंता पेट्रोल पंप, गोयल हैरिटेज, स्कोटैक, पैरा स्पोर्टस क्रीडा भारती और विद्या यूनिवर्सिटी हैं।