मेरठ में गुरुवार को कैलाश प्रकाश स्टेडियम में एक तरफ हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान का शुभारंभ हो रहा था। वहीं दूसरी ओर हॉस्टल के खिलाड़ियों ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयान किया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हॉस्टल में रह रहे 19 क्रिकेटरों के सब्र का बांध टूट गया। खिलाड़ी बोले- हमारे हॉस्टल से अच्छी तो कैदियों के रहने वाली जेल होगी।
हॉस्टल के खिलाड़ी बलिया निवासी रोहित सिंह ने बताया कि ट्रॉयल देकर चयनित हुए तो हॉस्टल मिला, लेकिन हॉस्टल में ये सुविधाएं मिलेंगी, इसकी उम्मीद नहीं थी। मैदान पर ट्रैक्टर चलवा दिया है, कहां खेलने जाएं। पीने के पानी के लिए मैदान से पानी लाना पड़ता है। पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
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लाइटें टूटी पड़ी हैं, रंग सीलन के कारण खराब हो चुका है। चित्रकूट के आलोक ने कहा कि खेल अधिकारियों से बात करते हैं तो धमकी देकर चुप रहने के लिए कहते हैं। मेस में चार्ट के अनुसार खाना नहीं मिलता। एक बार खाने में समझौता कर सकते हैं, लेकिन खेलने और रहने में परेशानी होने पर समझौता नहीं कर सकते।
खेल अधिकारी कुछ बोलने पर पीटने की धमकी देते हैं। खिलाड़ियों ने मेरठ से कहीं और हॉस्टल स्थानांतरण की मांग की है। कानपुर के निखिल यादव, सहारनपुर के दीप सिंह, मुजफ्फरनगर के भुवनेश्वर, झांसी के मयंक, इटावा के राहुल यादव, निखिल यादव, शिवम गिरी, आदित्य वर्मा सहित अन्य खिलाड़ियों ने हॉस्टल व खेल मैदान को लेकर रोष जताया है। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी योगेंद्रपाल से संपर्क नहीं हो सका।