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...जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं

Tue, 31 May 2016 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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पटेल मंडल में कवि सम्मेलन का उद्धाटन कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन करते अतिथि - फोटो : अमर उजाला
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 ‘हम अपनी जान के दुश्मन को जान कहते हैं, मोहब्बत की इस मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं’। वरिष्ठ शायर राहत इंदौरी ने जब ये कलाम पेश किया तो पूरा पटेल मंडप तालियों और दाद से गूंज उठा। मौका था अखिल भारतीय कौमी एकता कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का।
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उसके बाद जैसे ही वसीम बरेलवी ने ‘इश्क को महसूस किया जाए खुशबू की तरह, हम कोई शोर नहीं जो सुनाई देंगे’ ने खूब तालियां बटोरीं। ‘मेरा शहर मेरी पहल’ द्वारा इस आयोजन में कवि एवं शायरों ने आपसी भाईचारे पर कविताएं और शायरी प्रस्तुत कर समा बांध दिया। उद्घाटन अपर पुलिस महानिदेशक पीटीएस आलोक शर्मा, मंडलायुक्त आलोक सिन्हा, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, डीआईजी पीएसी महेश कुमार मिश्रा, डीएम पंकज यादव ने संयुक्त रूप से शमा रोशन करके किया। संचालन दीपक गुप्ता ने किया।
कवियित्री ममता वार्ष्णेय ने पंक्ति यूं पढ़ी कि ‘कैसे कह दूं जीवन बस सांसों का आना-जाना है, हर पल में अहसास नया है ये तो सफर सुहाना है’। डॉ. अर्जुन सिसौदिया बोले कि जिगर में पीर पर्वत सी कोई पलने नहीं देंगे, कभी हम देश के दिनमान को ढलने नहीं देंगे।
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प्रदीप चौबे ने पढ़ा कि कोई हमसा हुनर तो दिखाए, हम भिखारी से भीख ले आये। तुषा शर्मा ने शब्दों को कुछ यूं पिरोया कि ’मुझे तुम प्यार से पढ़ना मोहब्बत की कहानी हूं, चली सागर से जो मिलने वो नदियों की रवानी हूं’।
दीपक गुप्ता बोले कि ‘जियो ऐसे कि सबकी आस में जिंदा रहो, मरो ऐसे कि इतिहास में जिंदा रहो’। डॉ. नुजरत अंजुम ने पढ़ा कि ‘दुश्मनी से तो तुम्हें कुछ नहीं मिलने वाला, दोस्ती कर लो अगर मुझको मिटाना चाहो’। डॉ. पॉपुलर मेरठी ने पढ़ा कि ‘मैं हूं जिस हाल में ऐ मेरे सनम रहने दे, चाकू मत दे मेरे हाथों में कलम रहने दे’।
 कार्यक्रम में संयुक्त व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेन्द्र अग्रवाल, योगेश चंद जैन, कमल ठाकुर, राधा गोविंद ग्रुप के चेयरमैन योगेश त्यागी, मोहित जैन, समीर कोहली, नायब शहर काजी जैनुर राशिददीन, अमित कुमार अग्रवाल, दुखहरण शर्मा आदि मुख्य रहे।

कई बार नोकझोंक
कवि सम्मेलन और मुशायरे में पटेल मंडप में बैठने तक को भी जगह नहीं बची। देहात से भी काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। अंदर घुसने को लेकर भीड़ की कई बार पुलिस से नोंकझोंक भी हुई।
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