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प्राइवेट सिटी बसों के संचालन पर ब्रेक

Tue, 31 May 2016 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शहर में चलने जा रही प्राइवेट सिटी बसों के संचालन पर ब्रेक लगा दिया है। कोर्ट ने एसटीएटी से परमिट पा चुकी छह बसों को छोड़कर बाकी 37 सिटी बसों के संचालन पर स्टे दे दिया है। परमिट मामले में कोर्ट जुलाई में सुनवाई करेगी।
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हाईकोर्ट ने गत 29 जनवरी 2009 को महानगर प्राइवेट बस सेवा योजना को खत्म कर दिया था। आरटीओ ने गर्दन बचाने के लिए बसों के परमिट नवीनीकरण तो बंद कर दिए थे, लेकिन मामले में एसटीए से विधिक राय के नाम पर अवैध सिटी बसों को बिना परमिट और फिटनेस के शहर में संचालित कराए रखा।
अमर उजाला माय सिटी ने अभियान चलाया तो हरकत में आए आरटीए ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बसों को बंद करने का आदेश पारित किया था। बस ऑपरेटरों ने आदेश पर आपत्ति उठाते हुए 1994 से पहले की बसों को परमिट देने की मांग की थी।
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गत वर्ष एसटीए की विधिक राय आने के बाद आरटीए अध्यक्ष मंडलायुक्त आलोक सिन्हा ने इनका संचालन बंद करा दिया था। वहीं 44 बस परमिट धारकों ने आरटीए में हाईकोर्ट के आदेश की जद में नहीं आने की बात कहते हुए अपना पक्ष रखा था। बात नहीं बनने पर एक आपरेटर ने राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण (एसटीएटी) की शरण ली थी। एसटीएटी ने आपरेटर को परमिट जारी करने का आदेश दे दिया था।
एसटीएटी से मिली राहत के बाद बाकी 43 परमिट धारकों ने भी एसटीएटी में अपील की थी। एसटीएटी ने गत माह सभी 43 बसों को परमिट जारी करने के आदेश दिए थे। आरटीओ से पांच परमिट जारी किए गए थे। एसटीएटी के आदेश के खिलाफ मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (रोडवेज सिटी बस) ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। एमसीटीएसएल के एमडी संदीप लाहा ने बताया कि हाईकोर्ट ने एमसीटीएसएल की रिट पर सुनवाई करते हुए सोमवार को परमिट विहीन 37 बसों को परमिट देने से रोक लगा दी है।
जिन छह बसों को परमिट मिल चुका है उनकी जुलाई में सुनवाई करेगी। वहीं महानगर सिटी बस सेवा के अध्यक्ष हाजी इलियास और महामंत्री कल्याण सिंह ने कहा कि उन्हें कोर्ट के आदेश की कापी नहीं मिली है। वे भी मामले में अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट की शरण लेंगे।

नहीं ले पाए थे 37 बसों के परमिट
एनजीटी ने दिल्ली समेत एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहनों के संचालन पर रोक लगा रखी है। अधिकतर बस ऑपरेटरों के पास सिटी बसें 10 साल से पुरानी हो चुकी है। पुलिस और परिवहन अधिकारियों की मिलीभगत से जर्जर बसों का संचालन होता रहा है। एनजीटी के आदेश के बाद आरटीओ से पुरानी बसों को परमिट देने से इनकार कर दिया। एसटीएटी से परमिट के आदेश लेकर आए 5 बस ऑपरेटर ही परमिट ले पाए। बाकी 37 ऑपरेटर 10 साल पुरानी बस होने के चलते परमिट हासिल नहीं कर सके थे।

करोड़ों की चपत लगती है जेएनएनयूआरएम बसों को
अवैध सिटी बसों के चलते शहर में चल रही एमसीटीएसएल की जेएनएनयूआरएम बसों को करीब 15 लाख रुपये का घाटा हर माह पहुंचता है। कंपनी के एमडी संदीप लाहा ने बताया कि अवैध सिटी बसों के बंद होने से कंपनी का घाटा 80 लाख रुपये तक कम हो गया है।
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