प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुल लाक्षागृह बरनावा, बागपत से प्राप्त करने के बाद बीबीए व एमबीए की शिक्षा पूर्ण की। फिर योग के महत्व को जानकर हरिद्वार और ऋषिकेश से योग का प्रशिक्षण प्राप्त करके योग में ही भविष्य निर्माण व देश-विदेश में भारतीय योग संस्कृति के प्रचार प्रसार का निर्णय लिया।
सौरभ ने गांधीधाम गुजरात में लगभग दो वर्ष तक योग इंस्टीट्यूट चलाकर अनेक लोगों को लाभान्वित किया। वर्तमान में वे चीन के मुदानजियांग शहर में योगा डिवाइन फिट्नेस कंपनी में सीनियर योग शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। चीन में हजारों लोगों को आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान से लेकर आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा की शिक्षा दी। बताया कि विदेशों में बड़ी संख्या में युवा योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद सीखने में रुचि ले रहे हैं।
मांसाहार छोड़ बने शाकाहारी
सौरभ ने चीन में एक नई अलख जगाई। उसका नतीजा यह हुआ कि लोगों ने न सिर्फ योग को अपनाया, बल्कि कई मांसाहार छोड़कर शाकाहारी हो गए। हाल में सौरभ योगा कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड ऋषिकेश में पांच देशों के लोगों को ऑनलाइन योग की ट्रेनिंग दे रहे हैं। काफी लोग उनके ऋषिकेश इंस्टीट्यूूट पर ऑफलाइन भी योग सीख रहे हैं।