आईआईए मेरठ के साथ ही शहर के सभी औद्योगिक संगठनों ने कर्मचारियों का अप्रैल माह का वेतन देने में असमर्थता जताई है। उद्यमियों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण औद्योगिक इकाइयां भारी नुकसान में है, लेकिन इसके बावजूद सरकार उद्यमियों के हित के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। इस संबंध में उद्यमियों ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भी भेजा है।
दरअसल आईआईए की पहल पर पश्चिम उत्तरप्रदेश की प्रमुख औद्योगिक संस्थाओं वेस्टर्न यूपी चेंबर ऑफ कॉमर्स, चेंबर ऑफ कॉमर्स, लघु उद्योग भारती मेरठ महानगर, ऑल इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मेन्यूफैक्चरिंग, स्पोर्ट्स गुड्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, मेरठ इंड डेवलपमेंट फोरम ने आपसी सहमति से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिला अधिकारी अनिल ढींगरा को सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने लघु उद्योगों को उत्पादन प्रारंभ करने में आ रही दिक्कतों समेत अन्य परेशानियों के बारे में जानकारी दी।
ज्ञापन में यह बताई समस्या
1. अत्याधिक कठिन दिशा निर्देशों के कारण अनुमति मिलने के बावजूद इकाइयां उत्पादन प्रारंभ करने में असमर्थ हैं।
2. मार्च के महीने में सर्वाधिक खर्च होने के बावजूद लॉकडाउन अवधि का पूरा वेतन औद्योगिक इकाइयों द्वारा भुगतान कर दिया गया जबकि होली के त्यौहार एंव 22 मार्च से लॉकडाउन के बावजूद उत्पादन न्यूनतम था।
3. इकाइयां बंद होने के कारण निर्यातको के सामने ऑर्डर निरस्त होने का संकट खड़ा हो गया है।
4. निर्मित एंव अर्धनिर्मित सामानों का आवागमन बाधित होने से उत्पादन प्रारंभ किया जाना संभव नही है।
5. बंदी एंव बिजली की खपत ना होने के बावजूद भी फिक्स चार्ज की देयता एंव माह में देय तिथि 30 अप्रैल के कारण औद्योगिक इकाइयां आर्थिक संकट मे आ गई हैं। इसे 15 मई 2020 तक बढ़ाया जाना चाहिए।
6. औद्योगिक इकाइयों के पास अप्रैल माह का वेतन देने के लिए धन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इकाइयों को को लॉकडाउन अवधि का पूरा वेतन देने के लिए बाध्य न किया जाए। सभी उद्योग अपनी क्षमता के अनुसार न्यूनतम निर्वाहन भत्ता देने को तैयार हैं। शेष धनराशि ईएसआईसी या पीएमजीकेवाई के माध्यम से कर्मचारी को दी जानी चाहिए। इसके अलावा भुगतान करने पर असमर्थ इकाइयों पर कार्रवाई नहं होनी चाहिए।