मेरठ। हवा में घुलता स्मॉग लोगों की सांसें भारी कर रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में पहुंच रहा है। यह सेहत पर भारी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को 4317 मरीज पहुंचे। इनमें सबसे ज्यादा मरीज सांस की बीमारियां जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और खांसी के रहे। इनके अलावा आंखों में जलन, गले में खराश, थकान और सिरदर्द की शिकायत लेकर भी काफी मरीज गए।
यह होता है स्मॉग
स्मॉग शब्द अंग्रेजी के धुएं और धुंध से मिलकर बना है। यह तब बनता है जब हवा में मौजूद प्रदूषक कण, धुंध और सूर्य की किरणें आपस में मिलकर जहरीला मिश्रण तैयार करती हैं। जमीन के पास बनने वाली इस जहरीली परत के कारण दृश्यता घट जाती है और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।
ये हैं स्मॉग बढ़ने के प्रमुख कारण
वाहन प्रदूषण, औद्योगिक धुआं और निर्माण कार्य, मौसम की स्थिति
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दो सप्ताह में 25 फीसदी मरीज बढ़े
सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि स्मॉग में मौजूद सूक्ष्म धूल के कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। पिछले दो सप्ताह में सांस संबंधी मरीजों की संख्या में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ये हैं बचाव के उपाय
जिला अस्पताल की नाक-कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी कौशिक ने बताया कि सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें, जब स्मॉग का स्तर सबसे अधिक होता है। घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें या रूमाल से नाक-मुंह ढक लें। सांस लेने में परेशानी बनी रहे तो डॉक्टर को दिखाएं।